नये साल पर घूमने का प्लान बना रहे हाें ताे पहले ट्रेनाें का स्टेटस चेक कर लीजिये। नहीं ताे अाप सामान लेकर दाे दिन तक स्टेशन पर ही इंतजार करते रहे अाैर ट्रेन ना अाये। अापका नया साल कहीं स्टेशन पर ही ना बीत जाये। क्याेंकि राजधानी समेत 60 से अधिक ट्रेनें घंटों लेट हैं।
कोहरे का असर ट्रेनों पर अब बुरी तरह से पड़ने लगा है। पैसेंजर ट्रेनों से लेकर राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनें भी घंटों लेट चल रही हैं। ट्रेनें लेट होने से यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यात्री जरूरी कामों से समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। तमाम ट्रेनें इतनी ज्यादा लेट हैं कि यात्रियों को टिकट निरस्त कराने पड़ रहे हैं। बुधवार को भी 2200 से अधिक टिकट निरस्त कराए गए हैं।
24 घंटे देरी से चल रही है ट्रेनें
डेमो पिक
यह ट्रेनें हैं घंटों लेट
डिब्रूगढ़-दिल्ली ब्रह्मपुत्र 24 घंटे देरी से चल रही है। इस ट्रेन को मंगलवार रात पौने 11 बजे आना था लेकिन यह ट्रेन बुधवार रात को आई। जबकि दिल्ली-डिब्रूगढ़ ब्रह्मपुत्र मेल साढ़े 14 घंटे की देरी से चल रही है। यह ट्रेन सुबह 5:50 बहे के बजाय रात साढ़े आठ बजे आई। जय नगर से नई दिल्ली स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस 14 घंटे की देरी से चल रही है। यह ट्रेन सुबह 6:10 बजे के बजाय रात आठ बजे कानपुर सेंट्रल आई। नई दिल्ली-रांची संपर्क क्रांति एक्सप्रेस सात घंटे की देरी से चल रही है। इस्लामपुर नई दिल्ली एक्सप्रेस मगध एक्सप्रेस सुबह 3:20 बजे के बजाय 18 घंटे की देरी से रात सवा नौ बजे सेंट्रल आई। पटना राजधानी कानपुर डेढ़ घंटे देरी से, कोलकाता राजधानी पौन घंटा, दिल्ली-लखनऊ शताब्दी, दिल्ली-लखनऊ शताब्दी आधे घंटे देरी से चल रही है। आनंद विहार-गुवाहाटी नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस साढ़े सात घंटे, जोगबनी आनंद विहार एक्सप्रेस साढ़े छह घंटे, सियालदह अजमेर एक्सप्रेस सवा सात घंटे, संगम एक्सप्रेस चार घंटेे, विक्रमशिला एक्सप्रेस साढ़े सात घंटे देरी से चल रही है।
स्टेशन पर पड़ी हैं फॉग सेफ्टी डिवाइस
कोहरे का असर कम करने और ड्राइवरों को सिग्नल की जानकारी 500 मीटर पहले देने वाली फॉग सेफ्टी डिवाइस को ड्राइवरों ने साथ में ले जाने से मना कर दिया है। ऐसे में 250 ऐसी डिवाइट ड्राइवर लॉबी में ही रखी हैं। ड्राइवरों का कहना है कि वह पहले से इतना बोझ ले जाते हैं। ऐसे में आठ से नौ किलो की यह डिवाइस ले जाना, उतारना और चार्ज करना उनके बस की बात नहीं है। या तो इन्हें इंजन में फिट कराया जाए या फिर इसे ले जाने, उतारने और चार्ज करने की जिम्मेदारी दूसरे स्टाफ को दी जाएगी। ड्राइवर यूनियन के नेता विक्रम यादव का कहना है कि तकनीकी का विरोध नहीं है बल्कि इसे लाने ले जाने में ड्राइवरों का ध्यान केंद्रित नहीं हो पाएगा।