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आयकर विभाग की हर खाते पर नजर, बिना कारण भी मांगी जा सकती सूचना, आप भी कर रहें ये गलती तो रहें सतर्क

Mon, 08 Apr 2019 04:25 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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फाइल फोटो
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बदलती अर्थव्यवस्था में आयकर अधिकारियों के अधिकारों में बढ़ोतरी की गई है। आयकर अधिकारी पहले छह वर्षों तक ही किसी फर्म के खाते की जानकारी दोबारा मांग सकते थे। अब यह सीमा 10 वर्ष कर दी गई है।
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कानपुर में सीए दिनेश शुक्ल ने बताया कि अभी तक केवल किसी केस के सिलसिले में ही आयकर अधिकारी कारोबारी से सूचना मांग सकते थे पर अब बिना केस के भी जानकारी हासिल कर सकते हैं। फर्म में गड़बड़ी पाए जाने पर चार्टर्ड एकाउंटेंट पर भी पेनाल्टी लगाई जा सकती है।

कहा कि सरकार करदाताओं की संख्या बढ़ाने का प्रयास कर रही है, लेकिन आयकर अधिकारियों का व्यवहार करदाताओं (असेसी) के प्रति दोस्ताना नहीं होता।  सरकार ने अपने आयकर अधिकारियों को असीमित अधिकार दिए हैं पर क रदाता की समस्या सुनने का कोई कारगर मंच नहीं है। सवाल उठाया कि कोई आईटीओ (आयकर अधिकारी) उनके काम का आकलन कैसे कर सकता है।

चार्टर्ड एकाउंटेंट के काम का आकलन कमिश्नर लेबल के अधिकारियों की कमेटी करे तो भी ठीक, लेकिन किसी का रिटर्न गलत दाखिल होने पर कोई आईटीओ सीए पर पेनाल्टी लगाए, यह उचित नहीं।
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किसी चार्टर्ड एकाउंटेंट का काम गलत पाए जाने पर सजा देने का अधिकार सिर्फ चार्टर्ड एकाउंटेंट संस्थान को है और होना चाहिए। करदाता पर अधिक दबाव बनाने के लिए आयकर अधिनियमों में संशोधन किया गया है। 

मुआवजे के ब्याज पर टीडीएस क्यों
सीए दिनेश शुक्ल ने बताया कि यदि किसी की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है या अपंग हो जाता है और सरकार की ओर से उसके आश्रितों को जीवन यापन के लिए मुआवजा या क्षतिपूर्ति मिलती है तो उस मुआवजे के ब्याज पर टीडीएस काटने का कोई औचित्य नहीं है। आयकर विभाग का यह प्रावधान अव्यवहारिक है।
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