यूपी विधानसभा चुनाव के नतीजे भले ही भाजपा के पक्ष में रहे हों लेकिन पार्टी को यह स्वीकार करना होगा कि एक बार फिर वह सपा का दुर्ग भेदने में नाकाम रही है।
बात कर रहे हैं इटावा जिले की जिसे सपा का दुर्ग कहा जाता है। इटावा की तीन सीटों में से भाजपा ने दो सीटों पर जीत जरूर हासिल की लेकिन सपा के अभेद्य दुर्ग जसवंतनगर को भेदने मे नाकाम साबित हुई। जसवंतनगर सीट से सपा प्रत्याशी शिवपाल सिंह यादव ने भाजपा के मनीष पतरे को 52616 मतों से परास्त किया।
इस चुनाव में जसवंतनगर सीट प्रदेश की अहम सीटों में शुमार थी। जिसके चलते सभी की निगाहें इस सीट पर लगी थीं। शनिवार सुबह मतगणना चक्र का पहला परिणाम आया, इसमें भाजपा ने सपा से महज 65 मतों से लीड बनाई। एक बार लगा की मुकाबला कड़ा हो सकता है। जैसे ही आगे के चक्रों का परिणाम आया तो सपा पहले चक्र को छोड़कर लीड बनाती गई।
एक चक्र पिछड़ने के बाद सपा ने अंतिम चक्र तक लीड बनाए रखी। कुल 30 चक्रों में जसवंतनगर विधान सभा क्षेत्र के 233057 मतों की गणना की गई। जिसमे 879 मत पोस्टल के भी शामिल हैं। सपा ने चक्र संख्या दो में 2055 मतों से बढ़त बनाई। जो दस तक 14585 तक पहुंच गई। दोपहर बाद जैसे जैसे मतगणना ने रफ्तार पकड़ी तो सपा भाजपा से बढ़त बनाती चली गई।
इस चुनाव में 1327 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल कर सभी प्रत्याशियों को खारिज किया। इस बार भी जसवंतनगर विधान सभा क्षेत्र में साइकिल जमकर दौड़ी। जिसके कारण भाजपा की लहर भी सपा के इस अभेद्य दुर्ग को भेदने में सफल नही हो सकी।