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सीवी में दी गलत जानकारी, होगी जांच

Mon, 04 May 2015 01:44 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित विवाद को लेकर चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निलंबित कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह नए विवादों में घिर गए हैं। अब उन पर कुलपति की नियुक्ति से पहले राजभवन भेजे गए बायोडाटा में गलत जानकारी देने के आरोप लगे हैं।
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इस पर राज्यपाल ने जांच के आदेश दिए हैं। राज्यपाल की प्रमुख सचिव ज्यूतिका पाटकर ने 26 मार्च 2015 को पत्र लिखकर इस संबंध में प्रो. मुन्ना सिंह से जवाब भी मांगा है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निलंबित कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह के सेलेक्शन, योग्यता, नियम और मानक पर सवाल खड़े किए गए हैं।

कृषि विश्वविद्यालय के शिक्षक रहे डॉ. महेश सिंह बघेल और एडवोकेट अनुराग अवस्थी ने राज्यपाल राम नाईक से 9 मार्च 2015 को शिकायत में कहा है कि प्रो. मुन्ना सिंह के बायोडाटा में प्रोफेसर का पद वर्ष 2006 से दिखाया गया है, जो गलत है। वह (प्रो. मुन्ना सिंह) दिसंबर 2009 से प्रोफेसर बने हैं।
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इसलिए कुलपति बनने की अर्हता नहीं रखते हैं। प्रोफेसर बनने के बाद पांच साल तक पढ़ाने का अनुभव रखने वाले ही कुलपति बन सकते हैं। शिकायत कर्ताओं ने कुलपति की नियुक्ति निरस्त किए जाने की मांग भी की है। साथ ही कहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में जहां, जिसने भी गड़बड़ी की है, उन सबके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

मनचाहे व्यक्ति को तैनाती देने के उद्देश्य से कुलपति के नियुक्ति के नियम, कायदे बदले गए, जो कि प्रदेश में पहली बार हुआ है।

इससे पहले कुलपतियों के सेलेक्शन कमेटी में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक होते थे लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर रिसर्च (उपकार) के महानिदेशक को सेलेक्शन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया। इस संबंध में निलंबित कुलपति के मोबाइल फोन पर कॉल की गई लेकिन जवाब नहीं मिला।
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