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Kanpur News: 43 डिग्री तापमान में कूलर फेल, तप रहा इमरजेंसी वार्ड

Wed, 27 May 2026 01:42 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। जनपद का पारा 43 डिग्री सेल्सियस है। झुलसा देने वाली गर्मी पड़ रही है। ऐसे में भी मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों को गर्मी से राहत दिलाने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। मेडिकल कॉलेज के वार्डों में भर्ती मरीजों का हाल बेहाल है। वार्डों में भर्ती घायल और गंभीर रोगी पसीने से तर-बतर होने को मजबूर हैं।
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मेडिकल कॉलेज में दो इमरजेंसी वार्ड हैं। पहले वार्ड में दो एसी व पंखे लगे है। वहीं, दूसरे वार्ड में सिर्फ दो कूलर व पंखे लगे हैं। मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की तो इमरजेंसी के दूसरे वार्ड के दोनों पंखे बंद मिले। जिस वार्ड में कूलर लगे हैं, वहां 18 बेड पड़े नजर आए। सभी में मरीज भर्ती थे। चारों तरफ से बंद वार्ड होने पर उमस थी। इस वार्ड में उल्टी-दस्त के साथ कुछ सड़क हादसों में घायल भी भर्ती नजर आए।
गर्मी की वजह से तीमारदार कभी वार्ड में तो कभी इमरजेंसी कक्ष के बाहर हॉल में बैठे नजर आए। कुछ बाहर पेड़ की छांव में भी राहत पाते दिखे। तीमारदार तो किसी तरह टहल कर राहत पा लेते हैं लेकिन मरीजों को कूलर की हवा राहत नहीं पहुंचा पा रही है। मरीज बेबसी में वार्ड की गर्मी में उबलते हुए उपचार करवाने को मजबूर हैं। ऐसे में वार्ड में भर्ती लू पीड़ित मरीजों के स्वास्थ्य सुधार की जगह बीमारी बढ़ने की भी संभावना बनी हुई है।
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प्रतिदिन भर्ती होते 15 से 20 मरीज
मंगलवार को इमरजेंसी के दोनों वार्ड में करीब 32 मरीज भर्ती थे। दोपहर दो बजे के बाद ओपीडी बंद हो जाने पर इमरजेंसी में भीड़ रहती है। यहां आने वाले मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है। इनके लिए दो वार्ड आरक्षित हैं। वहीं, गंभीर घायल होने वाले मरीजों को इमरजेंसी के सामने बने ट्रामासेंटर वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है। इस तरह सुबह से लेकर शाम तक 15 से 20 मरीज प्रतिदिन भर्ती होते हैं। इनमें कुछ के स्वास्थ्य में सुधार होने पर शाम तक छुट्टी कर दी जाती है तो कुछ गर्मी की वजह से छुट्टी कराकर चले जाते हैं।

........................दृश्य-1

छह माह की नातिन को बहार लेकर बैठी रहीं दादी
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर जमीन में कमालपुर सट्टी निवासी चंदावती अपनी नातिन को गोद में लिए बैठी दिखीं। उन्होंने बताया कि मंगलवार सुबह सड़क हादसे में बेटी प्रेमिका घायल हो गई थी। उसको मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करवाया है। वार्ड में गर्मी अधिक होने के चलते छह माह की नातिन रोना बंद नहीं कर रही थी। इस पर वह नातिन को ठंडक वाले स्थान पर लेकर बैठी हैं। आधे घंटे में वह बेटी को देख कर वापस लौट आती हैं।
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दृश्य-2
चल पाने में असमर्थ होने की वजह से वार्ड में लेटना मजबूरी

खिरवां निवासी अनिल ने बताया कि दो दिन पहले सड़क हादसे में उनका बायां पैर टूट गया था। डॉक्टर ने उपचार के बाद उनको इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया है। वार्ड में कूलर तो लगे हैं लेकिन उनसे वार्ड ठंडा नहीं हो पा रहा है। दिन के समय वार्ड में गर्मी बहुत लगती है। चल न पाने की वजह मजबूरी वश बेड पर लेटना पड़ रहा है। वहीं जो मरीज चलने में सक्षम हैं। उन्हें गर्मी से परेशान होकर कुछ देर के लिए वार्ड के बाहर निकल जाते हैं।
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बयान.....
इमरजेंसी वार्ड को बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। वार्डों में लगे कूलरों में पानी भरवाने के भी निर्देश दिए गए हैं अगर कहीं कार्यों में लापरवाही हो रही है तो इसकी जानकारी करवाकर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करवाई जाएंगी। - डॉ. हरप्रीत सिंह, प्रधानाचार्य
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