मोबाइल पर घंटों लगातार बात करने की लत से दिमाग की नर्व को होने वाले नुकसान का अभी तक अंदाजा लगाया जा रहा था, पर वह रोग बन कर सामने भी आने लगा है। मोबाइल की तरंगों के कारण दिमाग की नर्व (स्नायु तंत्रिका) में गांठें बनने लगी हैं। डॉक्टर इसे नर्म प्रकृति का ट्यूमर बता रहे हैं।
कानपुर के हैलट अस्पताल में ऐसे चार रोगियों का इलाज शुरू हो गया है। कुछ रोगी दिल्ली और लखनऊ के विशेषज्ञों से इलाज करा रहे हैं। पांच छह सालों के अंतराल में इक्का-दुक्का रोगी ऐसी दिक्कत लेकर आते रहे, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ रही है।
हैलट के आईसीयू प्रभारी सीनियर न्यूरो रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि मोबाइल के लती रोगियों में अभी दो तरह की गांठें मिली हैं। एक मेनिनजीओमा है। यह गांठ (ट्यूमर) दिमाग की झिल्ली में बनती है। दूसरी गांठ स्वानोमा है। यह दिमाग की नर्व में बनती है। एक सप्ताह में चार रोगी भर्ती किए गए हैं। रोगियों की संख्या बढ़ना परेशान करने वाला संकेत है।
हैलट में अभी जिन चार रोगियों का इलाज चल रहा है, वे महिलाएं हैं। वार्ड नंबर 16 में भर्ती बेबी (45) के नर्व में गांठ बनी है। उसे शुरुआत में सिर में तेज दर्द, चक्कर, बेहोशी सरीखे लक्षण उभरे थे। इस पर जांच कराई गई। इन्हीं लक्षणों के साथ निशा बेगम (40) को भर्ती किया गया।
औरैया की किरन (40) और रश्मि (18) को भी यह दिक्कत हुई है। इनकी डायग्नोसिस रिपोर्ट तैयार करने पर पता चला कि इन्हेेें घंटों लगातार मोबाइल चलाने-बात करने की लत है। इसके अलावा हैलट में 16 रोगी पंजीकृत हुए हैं जिनके कान में तकलीफ बढ़ी है। नर्व में सूजन आ गई जिसका असर अंदर दिमाग तक है।
हाल में जो शोध पूरे हुए हैं उनमें मोबाइल के रेडिएशन से यह दिक्कत मिली है। अब इस तरह की मस्तिष्क की गांठों के रोगी बढ़ने लगे हैं। मोबाइल से होने वाले रेडिएशन का यह असर है। - डॉ. प्रेम सिंह, न्यूरो रोग फिजिशियन
कान का दर्द आम पेन किलर से ठीक नहीं होता
मोबाइल पर लगातार बात करने वालों के कान का दर्द आम पेन किलर से ठीक नहीं हो रहा है। कान में तेज आवाज बर्दाश्त करने की क्षमता भी घट रही है। ईएनटी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे रोगियों के लिए विशेष प्रकार की पेन किलर दवाओं का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
बचाव
- मोबाइल पर लगातार बात न करें।
- अगर लंबी बात हो तो बीच में गैप कर लें।
- बात करते समय साइड बदलते रहें।
- मोबाइल लाउड स्पीकर पर लगाकर सुन सकते हैं।
- बैटरी लो होने पर रेडिएशन अधिक होता है।