स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) एक जनवरी 2019 के बाद नॉन सीटीएस (चेक ट्रंकेशन सिस्टम) वाली चेक स्वीकार नहीं करेगा। ऐसे में जिन खाताधारकों के पास 2010 के पहले वाले चेक हैं, वे संबंधित बैंक में जाकर नई चेक बुक जारी करा लें। इस संबंध में बैंक की ओर से खाताधारकों को मैसेज भेजकर नई चेक लेने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
डेमो पिक
कानपुर में एसबीआई के 12 लाख से अधिक खाताधारक हैं। बैंक की ओर से 2010 से ही सीटीएस चेक जारी कर दी गई थी। इस चेक में सुरक्षा के कई फीचर हैं। जैसे 25 हजार से अधिक की चेक होने पर पानी की बूंद लगाकर उसके सही होने की जांच की जाती है।
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इसके अलावा अल्ट्रावायलेट किरणों से चेक को गुजारकर भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसके पहले चेक को फिजिक ली (भौतिक रूप से) सत्यापन कराने के बाद कैश किया जाता था। सीटीएस चेक आने के बाद इसकी फोटो खींचकर और पूरा विवरण ऑनलाइन भेजकर चेक कैश कराई जाती है।
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ये होती हैं सीटीएस चेक
इंटरनेट या दूरसंचार का उपयोग कर एक बैंक शाखा से अन्य में चेक भेजने की प्रक्रिया को चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) कहते हैं। इस प्रक्रिया में चेक मौजूदा ब्रांच में ही रखी रहती है। मशीनों के माध्यम से चेक की फोटो अन्य शाखाओं में भेजी जाती है। वहां एक ऑनलाइन फाइल बनाई जाती है। जिसमें किस-किस बैंकों की चेक है, इसका विवरण होता है। जिस बैंक की ब्रांच की चेक होती है, उसे भेज दी जाती है।