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फतेहपुर में मौरंग घाट के संचालन में इटावा के सिंडिकेट का वर्चस्व, सत्ता पक्ष से मिलता था संरक्षण

Wed, 10 Jul 2019 10:02 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
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अवैध मौरंग खनन
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फतेहपुर में मौरंग घाट के संचालन को लखनऊ सचिवालय के पंचम तल से संरक्षण दिलाने के नाम पर तीन सिंडीकेटों ने इंट्री मारी थी। विभागीय सूत्रों की मानें तो इनमें से एक ही सिंडिकेट को ही सफलता मिली। चर्चा है कि खुद को सत्ता का नजदीकी बताने वाला सिंडिकेट पूरे जिले के मौरंग व्यापार से चालीस फीसदी हिस्सा अकेले लेता था।
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शेष साठ प्रतिशत हिस्से का बंटवारा स्थानीय सत्ताधारियों, प्रशासन, पुलिस और पट्टेधारक के बीच होता था। जिले के मौरंग कारोबार को संरक्षण देने के नाम पर सबसे पहले बनारस फिर आगरा और बाद में इटावा के सिंडीकेट ने हाथ आजमाया।

 

अवैध खनन से निकली रेत
इन तीनों में से इटावा का सिंडीकेट जनपद में अपना सिक्का जमा पाने में सफल रहा। इस कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि सत्ता का नजदीकी बताकर ही इस सिंडीकेट ने लखनऊ सचिवालय के पंचम तल से डीएम पर दबाव बनवाया था और इसी हाई प्रोफाइल सेटिंग के नाम पर वह अपना चालीस फीसदी हिस्सा लेता था।

डीएम अभय के बाद राकेश कुमार निपटे थे
आठ जून 2014 को तत्कालीन डीएम अभय के तबादले के बाद यहां डीएम पद पर राकेश कुमार की तैनाती हुई। अपने एक साल के कार्यकाल में राकेश कुमार ने भी उन्हीं पट्टों को फलने-फूलने का खूब मौका दिया। राकेश कुमार के कार्यकाल में खनन माफिया ने नदी की बीच धारा से मौरंग निकालने के लिए ओती घाट में पुल तक बना दिया था।

 
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अवैध खनन
तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जनपद आगमन पर मीडिया ने जब जिले में अवैध खनन का मुद्दा उठाया तो सीएम ने सबसे पहले मंडलायुक्त प्रयागराज को निलंबित कर दिया था। इसके दो दिन बाद सीएम ने लखनऊ से तत्कालीन डीएम फतेहपुर राकेश कुमार को भी अवैध खनन कराने और नदी की बीच धारा से मौरंग निकलाने के आरोप में निलंबित कर दिया था।

सीबीआई टीम ले गई कागजात : सुखराज
जिला पंचायत सदस्य सुखराज निषाद के असोथर घर में सीबीआई की टीम बुधवार की सुबह पहुंची। उन्होंने बताया कि 2006 में उन्हें खनन के दो पट्टे मिले थे। गुरुवल तीन नंबर व कोर्राकनक दो नंबर। तीन साल तक चलाया। इसके बाद एक साल बंद रखा।

अप्रैल 2014 में डीएम अभय के समय नवीनीकृत हुआ। इसके बाद 2016 में अप्रैल माह में स्टे हो जाने से फिर बंद हो गया। सुखराज निषाद ने बताया कि सीबीआई टीम इससे पहले उनसे फतेहपुर व लखनऊ में पूछताछ कर चुकी है। बुधवार को फिर एक टीम गांव आई और उनसे एनओसी, डीड, रजिस्ट्री आदि कागज ले गई। सीबीआई टीम ने कागजात के चक्कर में उनके घर के कमरों में छानबीन की। हालांकि ज्यादा देर रुके बिना निकल गई। टीम का वह जांच में बराबर सहयोग कर रहे हैं।  
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