किसी ने सोचा भी नहीं होगा की ये तकनीक इस काम भी आ सकती है। आप भी जानकर हैरत में पड़ जाएंगे कि इन दिनों कानपुर शहर में कालोनियों का ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जाआईएस) सर्वे कराया जा रहा है। इसकी जरूरत क्यों आन पड़ी अब ये भी जान लीजिए...      दरअसल, केडीए ने अवैध निर्माणों की आकाश से निगहबानी शुरू कराई है। इसके लिए केडीए शहर की कालोनियों का जीआईएस सर्वे करा रहा है। इसमें सेटेलाइट से विभिन्न कालोनियों की तस्वीरें खींची जाएंगी। किदवई नगर योजना की सेटेलाइट इमेज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), हैदराबाद से केडीए को मिल गई हैं। इसके लिए केडीए ने इसरो को ढाई लाख रुपये का भुगतान किया है। नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर, लखनऊ के जरिए इसरो ने सेटेलाइट इमेज वाली दो सीडी बृहस्पतिवार को केडीए को सौंपी हैं। तीन माह पहले की यह तस्वीरें महज 50 मीटर ऊंचाई से ली गई हैं। अब इन इमेज पर रेवेन्यू रिकार्ड का नक्शा सुपर इंपोज किया जाएगा। इसके लिए योजना का लैंड ऑडिट कर रही कंपनी को सीडी सौंप दी गई हैं। केडीए वीसी के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि सेटेलाइट इमेज पर ड्रोन से ली गई तस्वीरों को सुपर इंपोज किया जाएगा। इसके जरिए तीन माह के बाद मौके पर कहां नया निर्माण,  कब्जा हुआ इसकी जानकारी मिल सकेगी।   सेटेलाइट इमेज पर रेवेन्यू रिकार्ड का नक्शा सुपर इंपोज करने पर यह पता लगेगा कि किस जमीन पर वर्तमान में क्या निर्माण है। जमीन का वास्तविक इस्तेमाल क्या था और अब क्या है। कहां जमीन खाली है और कहां प्लान की जगह कुछ और ही बन गया है। भविष्य के लिए योजना बनाने में भी यह इमेज मदद करेगी।   ड्रोन से ऐसे रुकेंगे अवैध निर्माण केडीए ड्रोन के जरिए प्रत्येक माह निधारित डेट पर कालोनियों की आकाशीय तस्वीर खींचेगा। अगले माह फिर उसी डेट पर इमेज निकाली जाएगी। दोनों चित्रों का मिलान किया जाएगा। इस दौरान यदि कोई नया निर्माण हुआ है तो वह चित्र में दिख जाएगा। - केडीए ने अवैध निर्माणों की आकाश से निगहबानी शुरू करा दी  - इसरो से मिली किदवई नगर की सेटेलाइज इमेज - ये तस्वीरें महज 50 मीटर ऊंचाई से ली गई हैं  - मौके पर कहां नया निर्माण हुआ इसकी जानकारी मिल सकेगी