महाराजपुर के रूमा में हाईवे किनारे खड़े ट्रक से स्कॉर्पियो की भिड़ंत में भाई-बहन समेत तीन लोगों की मौत और नौ लोगों के घायल होने की घटना ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध पार्किंग की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है। हाईवे किनारे बेतरतीब खड़े ट्रक, कंटेनर और डीसीएम लगातार लोगों की जान ले रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई कुछ दिनों तक सीमित रह जाती है।
रफ्तार का कहर और चंद सेकंड में उजड़ गया परिवार
कानपुर से गुजरने वाले तमाम प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग— चाहे वह सागर हाईवे हो, अलीगढ़ हाईवे, प्रयागराज हाईवे, लखनऊ हाईवे या फिर इटावा हाईवे आज 'किलर पार्किंग' में तब्दील हो चुके हैं। इन हाईवे पर स्थित होटलों और ढाबों के बाहर सड़क की मुख्य लेन तक भारी वाहनों की अवैध पार्किंग चौबीसों घंटे देखी जा सकती है।
पुलिस, एनएचएआई और परिवहन विभाग की नाकामी
बड़ा सवाल यह है कि जब यह अवैध पार्किंग खुलेआम और रोजाना हो रही है, तो स्थानीय थाना पुलिस, हाईवे पेट्रोलिंग वैन, एनएचएआई और परिवहन विभाग का दस्ता आखिर किसकी निगरानी कर रहा है? नियमों के मुताबिक हाईवे पर किसी भी व्यावसायिक वाहन को इस तरह असुरक्षित खड़ा करने की अनुमति नहीं है। लेकिन धरातल पर सच्चाई यह है कि यह जिम्मेदार विभाग सिर्फ तमाशा देखते हैं।
एक जैसी लापरवाही, एक जैसे खूनी हादसे
कानपुर के विभिन्न हाईवे पर पिछले दो वर्षों में खड़े वाहनों से टकराकर हुए ये बड़े हादसे साबित करते हैं कि यह समस्या कितनी गहरी हो चुकी है:
20 मई 2024: महाराजपुर में हाईवे किनारे खड़े डीसीएम से कार की भिड़ंत, 3 लोगों की मौत।
14 अक्तूबर 2024: पनकी क्षेत्र में खड़े ट्रक से तेज रफ्तार कार टकराई, 5 लोगों ने मौके पर दम तोड़ा।
16 अक्तूबर 2024: महाराजपुर में दोबारा खड़े डीसीएम से कार टकराई, एक दरोगा और युवती की दर्दनाक मौत।
01 दिसंबर 2024: सेनपश्चिम पारा में सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकराकर बाइक सवार युवक की मौत।
17 मई 2025: बिल्हौर क्षेत्र में हाईवे पर खड़े ट्रक से ट्रैक्टर-ट्रॉली भिड़ी, 1 की मौत।
30 अगस्त 2025: शिवराजपुर में खड़े ट्रक से पीछे से आ रहे कंटेनर की भिड़ंत, क्लीनर की मौत।
18 अक्तूबर 2025: सचेंडी में खड़े ट्रक से अनियंत्रित कार टकराई, मामा-भांजे की मौके पर मौत।
19 अक्तूबर 2025: महाराजपुर में एक बार फिर खड़े ट्रक से वैन जा टकराई, वैन चालक की मौत।
कब तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही?
हाईवे किनारे बिछे इस 'मौत के जाल' को हटाने के लिए अब तक कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है। अधिकांश स्थानों पर भारी वाहनों के ठहराव के लिए कोई वैध पार्किंग या ले-बाय (Lay-by) की व्यवस्था नहीं है।