कानपुर। प्रदेश सरकार विधानसभा चुनाव से पहले अवैध कालोनियों को वैध करने का पासा चल सकती है। इसी के मद्देनजर अवैध कालोनियों को वैध करने के लिए शासन ने राज्य शहरी आवास एवं पर्यावास नीति-2014 में संशोधन की तैयारी की है। ऐसा हुआ तो केडीए की सूची में शामिल 152 अवैध कालोनियों के वैध होने का रास्ता खुल सकता है। मानक न पूरे करने के कारण शासन की बार-बार घोषणाओं के बावजूद शहर में एक भी कालोनी का नियमितीकरण नहीं हो सका है।
प्रदेश की अवैध कालोनियों को नियमित करने की कवायद बीते तीन वर्षों से जारी है। इससे पूर्व भी नियमितीकरण की संभावनाएं तलाशने के लिए केडीए ने शासन के निर्देश पर अवैध कालोनियों का सर्वे कराया था। इसमें 170 अवैध कालोनियां चिह्नित हुई थीं। इनमें से 152 का लैंडयूज रेजीडेंशल मिला है।
प्रदेश सरकार ने कालोनियों को वैध करने के लिए पूर्व में मानकों में छूट भी दी थी। इसके बावजूद कोई कालोनी नए मानकों पर भी खरी नहीं उतरी। इन कालोनियों में न तो मानक के मुताबिक सड़क हैं और ना ही पार्क और न ही सामुदायिक जरूरतों के स्थान। इसी कारण इन कालोनियों में मकान-प्लाट सस्ते मिलते हैं। लोग विकास के लिए अतिरिक्त शुल्क भी नहीं देना चाहते।
छूट से बनेगी बात
आवास नीति में संशोधन के बाद इन मानकों को और शिथिल किया जा सकता है। जानकारों के मुताबिक 9 मीटर की जगह सड़क की चौड़ाई और कम तय हो सकती है। आसपास की जमीन लेकर कालोनी का पार्क, सामुदायिक सुविधाएं की जा सकती हैं विकसित।
39 कालोनियों का लक्ष्य
शासन ने 2016-17 में केडीए को 39 अवैध कालोनियों को नियमित करने का लक्ष्य भेजा है। केडीए अधिकारियों के मुताबिक शासन ने चालू वित्त वर्ष में कालोनियों में नियमितीकरण की संभावनाओं को तलाशने और संभव होने पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।