महत्वपूर्ण समय सीमा से पहले की है रिकवरी
यह डिवाइस फिजिकल थैरेपी, मस्तिष्क की सक्रियता और विजुअल फीडबैक तीनों का काम एक साथ करती है। उन्होंने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित व्यक्ति के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं। ऐसा तभी होता है जब शरीर का कनेक्शन दिमाग से टूट जाता है। स्ट्रोक से उबरने का सबसे कारगर समय पहले छह से 12 महीनों के भीतर का होता है, लेकिन इस डिवाइस ने उस महत्वपूर्ण समय सीमा से पहले रिकवरी की है। देश में अपोलो हॉस्पिटल के साथ डिवाइस का बड़े पैमाने पर परीक्षण चल रहा है। इसका ट्रायल रीजेंसी, अपोलो और यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ अल्स्टर में किया गया है। जल्द डिवाइस बाजार में आएगी।
ऐसे काम करेगी डिवाइस
प्रोफेसर आशीष के अनुसार, डिवाइस की मदद से फिजियोथैरेपी, मस्तिष्क की सक्रियता और विजुअल फीडबैक को एकीकृत किया जाता है। इससे बंद लूप नियंत्रण प्रणाली बनती है। इससे स्थिति के अनुसार मस्तिष्क के बदलने की क्षमता सक्रिय हो जाती है। ब्रेन स्ट्रोक के मरीज को इलाज के लिए इस डिवाइस की ईईजी कैप पहनाई जाती है। ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस डिवाइस रोगी के हिलने-डुलने के प्रयास का आंकलन करती है। साथ ही मस्तिष्क के मोटर कॉर्टेक्स से ईईजी संकेतों को पकड़ती है।
तेजी से होने लगती रिकवरी
डिवाइस का दूसरा हिस्सा है। रोबोटिक हैंड एक्सोस्केलेटन जो थैरप्यूटिक हैंड की तरह काम करता है। उपचार के दौरान रोगी की कंप्यूटर स्क्रीन पर हाथ से हरकत करने को कहा जाता है, मसलन मुट्ठी खोलना-बंद करना। जैसे ही दिमाग तक हाथ की हरकत करने का संदेश पहुंचता है, तो डिवाइस दिमाग में ईईजी सिग्नल और मांसपेशियों में ईएमजी सिग्नल उत्पन्न करती है। इन दो संकेतों को सक्रिय करने के लिए रोबोटिक मोड से जोड़ा जाता है। इससे इनमें सामंजस्य हो जाता है और रिकवरी तेजी से होने लगती है।