रील नहीं रीयल में फिल्म ‘टार्जन द वंडर कार’ देेखकर लोगों के उत्साह का ठिकाना न रहा। शुक्रवार को आईआईटी की टेककृति 2015 में प्रदर्शित की गई इस कार ने सबको खूब रिझाया। यहां आए लोगों ने डीसी टीया की भी जमकर सराहना की। यह कार दिलीप छाबरिया ने डिजाइन की है, जिन्हें कार का बेस्ट डिजाइनर माना जाता है।
दिलीप ने कहा कि कार डिजाइनिंग के क्षेत्र में आईआईटी स्टूडेंट्स रिसर्च कर सकते हैं। इसके अलावा स्टूडेंट्स ने कबाड़ से कार, मोटर साइकिल और स्कूटर बनाया, फिर ओल्ड सैक बिल्डिंग चौराहा से गेस्ट हाउस तक उसे दौड़ाकर भी दिखाया।
टेककृति के दूसरे दिन के प्रोग्राम का उद्घाटन फिजिक्स के नोबेल पुरस्कार विजेता सर एंथोनी लिगेट ने किया। साथ ही वर्ल्ड लीडर इन द थ्योरी आफ लो टेंपरेचर फिजिक्स की जानकारी दी। कहा कि फिजिक्स में थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल पर ध्यान देना होगा। इससे पहले ‘लीडरशिप समिट’ का आयोजन किया गया।
सीधी बात और तीखी बात से चर्चित प्रभु चावला ने भी एक्सपीरियंस शेयर किए। रॉयल बैंक ऑफ स्काटलैंड की पूर्व सीईओ एवं चेयरपरर्सन मीरा सान्याल ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में आईआईटियंस सफल हैं। सिविल इंजीनियरिंग से पढ़ाई करने वाले भी बैंकिंग क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
एस्टन मार्टिन ने आटो मोबाइल सेक्टर के बारे में बताया। कहा कि यह इंडस्ट्री बूम कर रही है। इनोवेशन का स्कोप भी बढ़ा है। इसका लाभ टेक्नोक्रेट्स उठा सकते हैं। एडोब इंडिया के एमडी नरेश गुप्ता और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के एक्सपर्ट डेविड स्करमूजा ने आईआईटियंस को सफलता का मूलमंत्र दिया।
कहा कि रिसर्च का जमाना है। नोबेल पुरस्कार मिलता है। तकनीक का ही नतीजा है कि सोशल मीडिया ने गांव से शहर तक में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। फेस्टिवल चेयरमैन प्रो. प्रवाल सिन्हा, कोआर्डिनेटर शिव्यांश टंडन और हेड मीडिया एंड पब्लिसिटी शभ्राजीत पाल ने कहा कि टेककृति में बेस्ट आइडियाज शेयर करने वालों निवेश का मौका मिलेगा। विजेताओं को 35 लाख का पुरस्कार दिया जाएगा।