देश में 22 आईआईटी की पढ़ाई और मंहगी होने जा रही है। इस पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की सहमति भी बन गई है। अगले सत्र 2017-18 से फीस बढ़ाई जा सकती है। इस बार बीटेक के साथ ही एमटेक, एमबीए, एमएससी, एमडैस (मास्टर ऑफ डिजाइनिंग), वीएलएफएम (विजनरी लीडरशिप इन मैन्युफैक्चरिंग) और पीएचडी की फीस भी बढ़ाई जाएगी।
आईआईटी से बीटेक करने वाले स्टूडेंटों की सालाना फीस इसी सत्र (2016-17) से दो लाख रुपये हो गई है। यह फीस पिछले सत्र (2015-16) में सालाना 90 हजार थी। एक सत्र भी नहीं बीता और फीस बढ़ाने पर दोबारा सहमति बन गई। इसी सिलसिले में रविवार को आईआईटी भुवनेश्वर में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग भी हुई।
चर्चा के बाद कहा गया कि आईआईटी का फीस स्ट्रक्चर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) की तरह होना चाहिए। तभी खर्च निकल पाएगा। चार साल की अवधि में आईआईटी के एक स्टूडेंट की पढ़ाई पर (बीटेक की पूरी पढ़ाई के दौरान) करीब 24 लाख रुपये खर्च होते हैं। बताते चलें कि देश के अलग-अलग आईआईएम की सालाना फीस 8 लाख से 16 लाख रुपये सालाना है।
नई आईआईटी खुलेंगी, सीटें बढ़ेंगी
अगले तीन शैक्षिक सत्र (2017-18, 2018-19 और 2019-20) की पढ़ाई के दौरान आईआईटी की अंडर ग्रेजुएट (यूजी), पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) और रिसर्च (पीएचडी) की 20 हजार सीटें बढ़ाई जाएंगी। इस पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की मुहर लग गई है। अभी सीटों की संख्या 80 हजार है। वर्ष 2020 तक ये सीटें एक लाख हो जाएंगी। मीटिंग में तय हुआ कि पुरानी आईआईटी की सीटें नहीं बढ़ाई जाएंगी। देश के अलग-अलग राज्यों में नई आईआईटी खोलने का फैसला हुआ है।
आसानी से मिले लोन, मंत्रालय करे ब्याज का भुगतान
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की मीटिंग में तय हुआ कि एजुकेशन लोन के ब्याज का भुगतान मानव संसाधन मंत्रालय से कराया जाए। आईआईटी प्रशासन या फिर स्टूडेंट एजूकेशन लोन का भुगतान करने में अक्षम हैं। आईआईटी का सारा बजट मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मिलता है। ऐसे में ब्याज भुगतान की जिम्मेदारी मंत्रालय की बनती है। बढ़ी फीस और उसके ब्याज भुगतान में स्टूडेंटों को दिक्कत आ रही है। वह बैंकों का ब्याज नहीं भर पा रहे हैं। इसका खामियाजा आईआईटी प्रशासन को भुगतना पड़ रहा है।