आईआईटी कानपुर में स्टार्टअप के लिए तेजी से माहौल बदल रहा है। छात्रों के साथ अब शिक्षकों में भी स्टार्टअप को लेकर क्रेज बढ़ हो चुका है। इसी का नतीजा है कि आईआईटी प्रशासन ने प्रोफेसर्स को भी अध्यापन कार्य के अतिरिक्त स्टार्टअप कंपनी चलाने की अनुमति दे दी है। इंस्टीट्यूट की सीनेट ने भी फैकल्टी एंटरप्रिन्योरशिप पॉलिसी को पास कर दिया है।
यह जानकारी शनिवार को आईआईटी के रिसर्च इस्टेब्लिशमेंट ऑफिसर (इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन) रवि पांडेय ने दी। वह यहां सीएसजेएमयू में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप कंपनी शुरू करने वाले प्रोफेसर्स को कुछ आर्थिक अनुदान देने का भी प्रस्ताव है।
जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा। उन्होंने बताया कि आईआईटी में इनोवेशन और रिसर्च पर भी काफी फोकस किया गया है। अभी तक कुल 540 पेटेंट हो चुके हैं। इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसके अलावा कुल 120 स्टार्टअप कंपनियां आईआईटी के सिडबी इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर में स्थापित की जा चुकी हैं।
अब छात्रों को दिए जाएंगे 60 हजार रुपये
रवि पांडेय ने बताया कि आईआईटी में पढ़ाई के दौरान स्टार्टअप कंपनी शुरू करने के लिए छात्र को संस्थान की तरफ से दी जाने वाली 30 हजार रुपये की धनराशि बढ़ा दी गई है। नए सत्र से छात्रों को अब 60 हजार रुपये की मदद दी जाएगी। यह धनराशि शुरुआती स्तर पर स्टार्टअप कंपनियों को दी जाएगी। इसके बाद के चरण में छात्र सिडबी इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर से अधिक फंड हासिल कर सकेंगे।
आइडिया दीजिए, 30 लाख का फंड पाइए
रवि पांडेय ने बताया कि सिडबी इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर ने बीआईआरएसी की सहयोग से सस्टेनिबल एंटरप्रिन्योरशिप एंड इंटरप्राइजेज डेवलपमेंट फंड जारी किया है। इसके जरिये वेस्ट टू हेल्थ मैनेजमेंट, हेल्थकेयर, मेड टेक, एग्री टेक और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अच्छा स्टार्टअप आइडिया देने वालों को 30 लाख रुपये तक का फंड दिया जाएगा। आवेदन की अंतिम तिथि 25 मार्च है। इच्छुक उम्मीदवार bit.ly/pptpitchdesk पर आवेदन कर सकते हैं। किसी भी तरह की सूचना हासिल करने के लिए rohinid@iitk.ac.in पर ई-मेल कर सकते हैं।