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आईआईटी की बिजली, पानी काटने वाली ‘बदमाश कंपनी’ पर होगी कार्रवाई

Fri, 30 Sep 2016 08:13 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, कानपुर
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आईआईटी कानपुर
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कानपुर आईआईटी कैंपस की बिजली, पानी काटने वाली स्टूडेंट्स की ‘बदमाश कंपनी’ पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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मैटेरियल साइंस के रिसर्च स्कॉलर (पीएचडी) आलोक कुमार पांडेय की मौत के बाद स्टूडेंटों के आंदोलन और बवाल की जांच रिपोर्ट आ गई है। पांच सदस्यीय कमेटी ने आंदोलन को अनुशासनहीनता करार दिया। साथ ही कुछ रिसर्च स्कॉलर के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को बोर्ड ऑफ गवर्नर (बीओजी) के समक्ष रखी गई। चर्चा के बाद कार्रवाई पर सहमति बनी है। अब मामला सीनेट के समक्ष रखा जाएगा, फिर कार्रवाई पर अंतिम मुहर लगेगी।  
बीओजी की मीटिंग शुक्रवार को आईआईटी कानपुर के पायनियर बैच सभागार में हुई। इसमें रिसर्च स्कॉलर की मौत और उसके बाद पैदा हुए हालात पर चर्चा की गई। आईआईटी खड़गपुर के पूर्व निदेशक की जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया गया। साथ ही कहा गया कि दोबारा ऐसी घटना न हो, यह व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। रिसर्च स्कॉलर की मौत हार्ट अटैक से हुई थी, फिर भी स्टूडेंटों ने आंदोलन किया। पठन-पाठन, रिसर्च और डेवलपमेंट का काम रोका। कैंपस की बिजली काट दी। पानी की सप्लाई बंद करने की कोशिश भी हुई। तमाम अनुचित मांगें भी रखी गईं। निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना, उप निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी और डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स प्रो. एआर हरीश को घंटों बंधक बनाए रखा गया। ओल्ड सैक चौराहे पर सीनियर प्रोफेसर डॉ. पांडा से अभद्रता हुई। स्टूडेंटों से बातचीत करने पहुंचे चार सीनियर प्रोफेसरों के खिलाफ हूटिंग की गई। गो बैक, शेम शेम के नारे लगे। इसके साक्ष्य क्लोज सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी) कैमरा और वीडियो फुटेज से मिले हैं।  
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 निशाने पर रिसर्च स्कॉलर
 रिसर्च स्कॉलर निशाने पर रहे हैं। कमेटी का कहना है कि आंदोलन को हवा रिसर्च स्कॉलर ने दी। बीटेक के स्टूडेंटों को पूरे मामले में जबरन शामिल किया गया। उन्हें क्लास करने से रोका गया। जबरन क्लास बंद कराई गई। बीटेक के कुछ स्टूडेंटों ने विरोध किया तो उनसे मारपीट भी हुई। इसकी मौखिक शिकायत आईआईटी प्रशासन से पहले ही की जा चुकी है। आंदोलन को हवा देने वाले स्टूडेंटों की पहचान कर ली गई है।   
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ये था मामला
8 अगस्त 2016 को सीने और कंधे के पास दर्द के बाद रिसर्च स्कॉलर आलोक को स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद आलोक को कार्डियोलॉजी रिफर कर दिया। इसी बीच रिसर्च स्कॉलर की मौत हो गई। स्टूडेंटों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर आंदोलन छेड़ दिया। 10 अगस्त तक प्रदर्शन चलता रहा। इसके बाद इंस्टीट्यूट एडवाइजरी कमेटी (आईएसी) की मीटिंग की और स्टूडेंटों की मांग मान लीं, फिर आंदोलन खत्म हुआ। हालांकि इंस्टीट्यूट की जांच कमेटी ने स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों को क्लीन चिट दे दिया था।
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