आईआईटी के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ड्रोन तैयार किया है जो पांच किलो भार तक की दवाएं, मेडिकल किट पहाड़ी व दुर्गम इलाकों में आसानी से ले जा सकता है।
अब कानपुर आईआईटी का ड्रोन देश के अलग-अलग कोनों में कोरोना वैक्सीन पहुंचाएगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) को प्रक्रिया शुरू करने से पहले आईआईटी के साथ मिलकर वैक्सीन को ड्रोन से पहुंचाने में तापमान समेत अन्य बिंदुओं पर स्टडी करने की अनुमति भी दे दी है।
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इसमें सफलता मिलने के बाद वैक्सीन की आपूर्ति की जाएगी। आईआईटी के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ड्रोन तैयार किया है जो पांच किलो भार तक की दवाएं, मेडिकल किट पहाड़ी व दुर्गम इलाकों में आसानी से ले जा सकता है। विभागाध्यक्ष प्रो. एके घोष की देखरेख में आईआईटी के पूर्व छात्र निखिल उपाध्याय ने यह ड्रोन तैयार किया है।
संस्थान के इंक्यूबेटेड सेंटर से निखिल की कंपनी सीडी स्पेस रोबोट प्राइवेट लिमिटेड जुड़ी है। निखिल ने बताया कि परीक्षण के दौरान इस ड्रोन ने उत्तराखंड की दुर्गम पहाड़ियों में सुुरक्षित ढंग से ब्लड पहुंचाया था। अमूमन वहां तक सामान पहुंचाने में डेढ़ से दो घंटे लगते थे पर ड्रोन 15 मिनट में पहुंच गया था।
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इन बिंदुओं पर होगी स्टडी
निखिल ने बताया कि चूंकि ड्रोन में वाइब्रेशन होता है और यह बैटरी से चलता है, ऐसे में तापमान में अप डाउन होता रहता है तो इससे कहीं वैक्सीन को कोई खतरा तो नहीं, इस पर आईसीएमआर और आईआईटी के वैज्ञानिक मिलकर स्टडी करेंगे। अगर वैक्सीन के प्रभाव में कुछ कमी आती है तो ड्रोन में उसी हिसाब से बदलाव किए जाएंगे। साथ ही आईआईटी की फ्लाइंग स्ट्रिप पर ड्रोन को उड़ाकर भी देखा जाएगा कि कितनी देर में यह वैक्सीन लेकर निर्धारित स्थान पर पहुंच सकता है। सब कुछ सही रहा तो कम समय और खर्च में वैक्सीन पहुंचाई जा सकेगी।