क्लोन चेक के जरिए आईआईटी कानपुर के अकाउंट से निकाले गए 48 लाख 82 हजार रुपये एसबीआई ने इंस्टीट्यूट प्रशासन को लौटा दिए हैं। इसकी जानकारी आईआईटी प्रशासन ने हाल ही में हुई बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) की बैठक में दी है।
बीओजी की रिपोर्ट को शनिवार को सार्वजनिक किया गया। रिपोर्ट में इंस्टीट्यूट प्रशासन ने बताया है कि बैंक ने घटना के बाद पहले 14.07 लाख रुपये लौटाए, लेकिन शेष रकम देने से इंकार कर दिया था। बाद में बैंक के अफसरों ने चूक स्वीकार करते हुए शेष 34.75 लाख रुपये भी वापस कर दिया। उप निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने बताया कि इंस्टीट्यूट के खाते से निकाली गई रकम मिल गई है। फर्जीवाड़ा करने वालों को पकड़ने के लिए पुलिस जांच कर रही है। पुलिस को ही यह पता करना है कि आखिर किस स्तर पर और किसने फर्जी तरीके से इंस्टीट्यूट के अकाउंट से रकम निकाली थी। पूरे घटनाक्रम की जानकारी बोर्ड ऑफ गवर्नेंस को दे दी गई है।
पिछले साल हुआ था फर्जीवाड़ा
मामला जुलाई 2017 का है। इंस्टीट्यूट प्रशासन ने पांच जुलाई 2017 को मेसर्स इजी सोर्स एचआर सॉल्युशन लिमिटेड फर्म को 2.04 लाख रुपये का चेक दिया था। चेक का नंबर 68346 था। फर्म मैनेजर ने बैंक में चेक लगाया तो मालूम हुआ कि इस चेक नंबर पर पहले ही 1.80 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। फर्म मैनेजर ने तुरंत इसकी जानकारी आईआईटी के अधीक्षक वीरेंद्र कुमार गिरी को दी। अधीक्षक ने तुरंत बैंक खाते को चेक कराया तो मालूम हुआ कि खाते से 12 जून से चार जुलाई के बीच 48 लाख 82 हजार रुपये निकाले जा चुके हैं। अधीक्षक ने बैंक अफसरों पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाया तो बैंक ने तुरंत आईआईटी के खाते में 14.07 लाख रुपये डाल दिए लेकिन शेष 34.75 लाख रुपये देने से मना कर दिया। इस पर इंस्टीट्यूट प्रशासन ने बैंक प्रशासन पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी।