रनियां (कानपुर देहात)। खानचंदपुर व उसके आस-पास इलाके के भूजल में मिले क्रोमियम को दूर करने के लिए आईआईटी कानपुर की टीम बुधवार से सर्वे करेगी। यहां आने के बाद टीम मिट्टी, पानी, हवा का नमूना लेगी। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आईआईटी कानपुर के बीच करार भी हो गया है।
दूषित भूगर्भ जल को साफ करने की योजना के तहत तीन चरण में काम होना है। इस कार्य के लिए शासन से 2.65 करोड़ रुपये भी जारी कर दिए गए हैं। आईआईटी के वैज्ञानिक खानचंद्रपुर में डंप रहे क्रोमियम स्थल, कुंभी निस्तारण स्थल से मिट्टी व प्रभावित क्षेत्र से पानी, हवा का सैंपल लेंगे। बता दें कि एनजीटी ने छह माह पहले आईआईटी को खानचंद्रपुर सहित उसके मजरे चौहानपुरवा, पालपुरवा और यादवपुरवा, उमरन, शिवनाथपुरवा, घनारामपुर सहित अन्य जगहों पर फैले क्रोमियम युक्त पानी को शुद्ध व वहां की मिट्टी से क्रोमियम खत्म करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद आईआईटी के विशेषज्ञों ने इन क्षेत्रों में पहुंच कर क्रोमियम पर अध्ययन किया। इसके बाद खानचंद्रपुर में क्रोमियम को खत्म करने का जिम्मा उठाया है।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी मनोज चौरसिया ने बताया कि आईआईटी से हुए करार के तहत बुधवार को एक टीम खानचंद्रपुर व क्रोमियम प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करेगी। वैज्ञानिक मनोज कुमार तिवारी और पुरानादी बॉस के नेतृत्व में टीम भूजल, मिट्टी और हवा की जांच के लिए सर्वे शुरू करेगी।
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बयान...
कानपुर देहात के खानचंदपुर में क्रोमियम युक्त पानी को शुद्ध करने और मिट्टी की जांच के लिए आईआईटी से हुए करार पर शासन ने परियोजना के लिए 2.65 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। प्रथम चरण में पानी में क्रोमियम को मुक्त करने का काम किया जाएगा। बुधवार से टीम सर्वे के आधार पर क्रोमियम के सूक्ष्म कणों को नष्ट करने और दूषित भूजल को शुद्ध करने की कार्ययोजना पर काम करना शुरू करेगी। इसके लिए विभागीय स्तर पर भी तैयारी शुरू की गई है। - मनोज चौरसिया, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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180 लोगों की जांच में आड़े आ रहा बजट
क्रोमियम प्रभावित क्षेत्र खानचंद्रपुर व रनियां नगर के कुछ वार्ड से लोगों की लगातार स्वास्थ्य निगरानी करने के निर्देश हैं। एनजीटी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग हर माह लोगों से खून, पेशाब के नमूने लेकर क्रोमियम, मर्करी, फ्लोराइड की जांच कर रहा है। एक व्यक्ति की जांच पर करीब आठ हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। मई और जून माह में 180 लोगों के सैंपल लिए गए, इन्हें जांच के लिए भेज दिया गया लेकिन बजट न होने से भुगतान नहीं हुआ तो रिपोर्ट भी अटकी है। इधर रिपोर्ट न आने से लोगों की शरीर में भारी तत्वों की मात्रा का पता नहीं चल पा रहा और उनकी स्वास्थ्य निगरानी भी ठीक से नहीं हो पा रही है। डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष वाजपेयी ने बताया कि मई माह में 90 व जून माह 90 लोगों की जांच के लिए सैंपल लिए गए थे। इन्हें जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच कराने के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च है। इसके लिए वित्तीय नियंत्रक से बजट की मांग की गई है।
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हर माह लिए जाते हैं 90 लोगों के सैंपल
प्रत्येक माह के आखिरी सप्ताह में स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी सरवनखेड़ा डॉ. राकेश यादव और पीएचसी रनियां के प्रभारी डॉ. विशाल भसीन के नेतृत्व में टीम क्रोमियम प्रभावित क्षेत्रों में जाती हैं। यहां से तीन दिन के अभियान में 90 लोगों के सैंपल लिए जाते हैं। इसमें क्रोमियम, मर्करी, फ्लोराड की जांंच कराई जाती है। डॉ. राकेश यादव ने बताया अभियान तीन दिन चलता है। प्रत्येक दिन 30 लोगों के खून, पेशाब के नमूने लिए जाते हैं। लाेगों से उनके स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी ली जाती है। यदि किसी में कोई बीमारी के लक्षण मिलते हैं तो उसको चिह्नित कर इलाज शुरू कराया जाता है।