अपनी योग्यता को पहचानने के साथ क्षमताओं को बढ़ाने पर काम करने की आवश्यकता है। सोचे कि ऐसा क्या किया जाए जिससे पहले से कम समय में काम खत्म हो जाए। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में आपकी क्षमता आपकी ताकत है। यह बातें आईआईटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कही। उन्होंने छात्रों को जीवन की चार सीख दी। उन्होंने कहा, छात्र अपनी क्षमता को बढ़ाएं और सवाल पूछने से न चूकें।
जब सवाल पूछे जाते हैं, तभी नए विचारों का जन्म होता है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि हमारे समय में ऐसे दीक्षांत नहीं होते थे। मैं अपने दीक्षांत में शामिल नहीं हो पाया था, लेकिन आज दूसरे रूप में यहां शामिल होने का मौका मिला। दूसरी सीख के रूप में उन्होंने छात्रों को सीखते रहने पर जोर दिया। कहा कि बीटेक कर लिया, अच्छी जॉब मिल गई अब यहां से जीवन की असली पारी शुरू होती है।
आईआईटी दीक्षांत समारोह
- फोटो : अमर उजाला
अब समय हैं अपने ज्ञान को इस्तेमाल करने का। दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, इसलिए स्वयं को अपडेट रहने की जरूरत है। उन्होंने छात्रों से कहा कि फेल होने से न डरें। अपने जीवन का उदाहरण दिया कि आईएएस होने के बाद भी कैसे वह असफलता के भय से ग्रसित हो गए, जबकि किसी दूसरे आईएएस ने उस कार्य को किया और पुरस्कार भी जीता। उन्होंने छात्रों को अंतिम सीख विश्वास की दी।
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कहा कि संस्थान में लाला जी कैंटीन चलती थी, जहां 35 पैसे का समोसा और दो रुपये की कोल्ड ड्रिंक मिलती थी। कई बार पैसे न होने पर क्रेडिट पर काम चलता था। उनको पता था कि आईआईटी के छात्र हैं, पैसे मिल जाएंगे। यह विश्वास होना जरूरी है। अपने कार्य, अपनी कंपनी, लोगों के साथ विश्वास जरूर करें।
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संस्थान का किया भ्रमण, बोले काफी कुछ बदल गया
आईआईटी में 1989 कंप्यूटर साइंस बैच के छात्र रहे संजय मल्होत्रा ने संस्थान का भ्रमण भी किया। उन्होंने कहा कि संस्थान पूरी तरह से बदल चुका है। मेरा रोल नंबर पांच अंकों का हुआ करता था, लेकिन अब छह अंकों में होता है। संस्थान का विकास देखना काफी सुखद है। आईआईटी की काफी खुशनुमा यादें जुड़ी हैं। हमने हमेशा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखी। क्रिकेट, बैडमिंटन खेलना, ट्रंक पर नाम लिखा होना जैसी छोटी यादें आज भी जेहन में ताजा हैं। काफी कुछ बदला, नहीं बदला तो केवल छात्रों का पढ़ने और शिक्षकों का पढ़ाने का उत्साह।