साइबर सिक्योरिटी, शैक्षिक और शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से मंगलवार को आईआईटी कानपुर और न्यूयार्क यूनिवर्सिटी अमेरिका से समझौता हुआ है। यह समझौता अगले सात साल तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान फैकल्टी और स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम चलाए जाएंगे। इसका मतलब है कि अमेरिका के टीचर, स्टूडेंट आईआईटी कानपुर आकर पढ़ाई, रिसर्च करेंगे। यही काम आईआईटी के टीचर, स्टूडेंटों को करना होगा।
न्यूयार्क यूनिवर्सिटी की मदद से आईआईटी कानपुर साइबर सिक्योरिटी को और मजबूत बनाएगा। इसके लिए सेंटर फॉर साइबर सिक्योरिटी फार क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर ने हर साल कार्यशाला और रिसर्च का आयोजन किया जाएगा।
दो संकायों के स्नातक (बीटेक या बीएस) या फिर पीएचडी के छह स्टूडेेंटों को टेक्निकल ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो. मणींद्र अग्रवाल और प्रो. संदीप शुक्ला ने बताया कि स्टूडेंटों के इंटर्नशिप की व्यवस्था की जाएगी। शार्ट टर्म कोर्स कराके सर्टिफिकेट दिए जाएंगे। भविष्य में साइबर सिक्योरिटी का दायरा बढ़ेगा, इसलिए एक्सपर्ट तैयार करना जरूरी है।