कानपुर। नगर निगम में पार्षद कोटा 50 लाख से बढ़कर 55 लाख रुपये किया गया। अपार्टमेंट में ब्यूटी पार्लर, बुटीक, शोरूम सहित अन्य तरह का व्यावसायिक उपयोग करने वाले लोगों से काॅमर्शियल गृह कर वसूला जाएगा। नगर निगम अपनी सभी संपत्तियों की वर्तमान स्थिति की जांच कराएगा। ये फैसले मंगलवार को नगर निगम कार्यकारिणी समिति की बैठक में लिए गए। कन्वेंशन सेंटर का संचालन कानपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के माध्यम से ही करने का फैसला हुआ पर शर्त रखी गई कि इससे होने वाली आय का 50 प्रतिशत हिस्सा नगर निगम को मिलेगा।
नगर निगम समिति कक्ष में महापौर प्रमिला पांडेय की अध्यक्षता में कार्यकारिणी की एक घंटे चली बैठक के दूसरे दिन आगामी वित्तीय वर्ष का 33.59 अरब रुपये और जलकल विभाग का 4.18 अरब रुपये का मूल बजट स्वीकृत हुआ। बजट में पहली बार पार्षदों के प्रस्ताव पर कार्य के लिए अलग से निधि का प्रावधान किया गया है। इस मद में साढ़े छह करोड़ रुपये रखे गए हैं। पार्षद राजकिशोर यादव ने कहा कि शहर में हजारों अपार्टमेंटों में बने फ्लैटों में से कई में व्यावसायिक गतिविधियां की जा रही हैं लेकिन ऐसे भवन स्वामी निगम को आवासीय गृहकर ही दे रहे हैं। कई अपार्टमेंट भवन के हिसाब से ही गृहकर दे रहे हैं जबकि उनमें कई फ्लैट बने हैं। प्रति फ्लैट के हिसाब से कर लिया जाना चाहिए। यदि इसका सर्वे कराके शिकंजा कसा जाए तो नगर निगम की करोड़ों रुपये की आय होगी।
इस पर महापौर ने अफसरों से कहा कि जोनवार ऐसे अपार्टमेंटों का सर्वे किया जाए जिनमें व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। उनसे व्यवसायिक गृहकर लिया जाए। इससे नगर निगम को करीब 10 करोड़ रुपये तक आय होने की संभावना है। समिति के सदस्यों ने पार्किंग, विज्ञापन और यूजर चार्ज वसूली पर जोर दिया। तर्क दिया कि इन मदों में नगर निगम की आय कम है। इसको बढ़ाने से नगर निगम की आय बढ़ेगी तो तेजी से शहर का विकास होगा। कर चोरी करने वालों पर कार्रवाई का भी व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया।
बैठक होने के बाद महापौर ने बताया कि वह नगर निगम की संपत्तियों के लिए अगले हफ्ते से जोनवार अफसरों के साथ बैठक करेंगी। एक-एक संपत्तियों का सर्वे कराया जाएगा। कब्जेदारों से संपत्तियां खाली कराई जाएंगी और उनका निस्तारण करके आय बढ़ाई जाएगी। नगर निगम के कई सामुदायिक केंद्रों, बरातशालाओं पर कब्जे हैं या जर्जर हो चुके हैं। इनको चिह्नित करके सही कराया जाए ताकि आय बढ़े। पार्षदों ने कहा कि इनको भी मंगल भवन की तरह विकसित की जाए।
बैठक में तय हुआ कि 96.29 करोड़ की लागत से बने कन्वेंशन सेंटर को स्मार्ट सिटी से ही संचालित किया जाए। महापौर ने कहा कि संचालन स्मार्ट सिटी करेगा। इससे होने वाली आय का 50 प्रतिशत हिस्सा नगर निगम कोष में जाएगा।
8.99 अरब बजट खर्च नहीं कर पाया नगर निगम
महापौर प्रमिला पांडेय ने बैठक के बाद बताया कि नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2025-26 में 28.40 अरब का बजट था। 8.99 अरब रुपये का बजट खर्च नहीं हो पाया। इसलिए नए वित्तीय वर्ष के लिए 33.59 अरब का बजट रखा है। जलकल विभाग का पिछले वित्तीय वर्ष में 3.62 अरब का बजट था जिससे बढ़ाते हुए 4.18 अरब बजट रखा गया है।
जलकल विभाग ने सीवर, पानी के लिए बढ़ाया बजट
जलकल विभाग के जीएम आनंद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सीवर, पेयजल और मैनहोल की मरम्मत के मद में 10 करोड़ से बजट बढ़ाकर 15 करोड़ कर दिया गया है। पाइपलाइनों और ट्यूबवेल के मेंटीनेंस में 4.5 करोड़ से 5.5 करोड़, नई सीवर और वाटर लाइन बिछाने के मद में तीन-तीन करोड़ से बढ़ाकर बजट पांच-पांच करोड़ किया गया है। केमिकल खर्च 4.40 से बढ़ाकर पांच करोड़, डीजल खर्च में 17.10 से बढ़ाकर 18.70 करोड़ किया गया है।