कोरोना फेफड़ों में ऐसी खराबी पैदा कर दे रहा है, जिसके सुधरने की गुंजाइश पर अभी कुछ तय नहीं है। कोरोना संक्रमण से रोगी के निगेटिव हो जाने के बाद फेफड़ों में फाइब्रोसिस हो जाती है। इससे रोगी को बाद में भी उतनी तकलीफ हो रही है। ऐसे में फेफड़ों के ट्रांसप्लांट की राह बचती है।
एलपीएस कार्डियोलॉजी संस्थान में फेफड़ों और हृदय ट्रांसप्लांट का प्रस्ताव बन चुका है। कोरोना काल की वजह से इसका काम अभी रुका है लेकिन यह स्थिति गुजरने के बाद संस्थान प्रबंधन अंग प्रत्यारोपण के लाइसेंस के लिए आवेदन देगा। एसजीपीजीआई चंडीगढ़ पहले ही फेफड़ा ट्रांसप्लांट शुरू कर चुका है।