सरकार और सामाजिक संस्थाएं भले ही बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान बढ़ाने में लगी हों, लेकिन आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो बेटियों को अभिशाप समझते हैं। ऐसा ही एक मामला यूपी में उरई के कैलिया थाने में आया। जहां नवविवाहिता ने महिला सीओ रुक्मिणी वर्मा को शिकायत पत्र देकर बताया कि बेटी होने पर ससुरालियों ने उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया।
बेटी को साथ लेकर दफ्तर में बिलखती मां को देख सीओ का भी पारा चढ़ गया और उन्होंने तत्काल थाना प्रभारी को बुलाकर ससुरालियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की बात कही।
जानकारी के मुताबिक पूनम पत्नी बलवीर निवासी ऐबरा थाना कैलिया सोमवार को आठ दिन की बच्ची को सीने से लगाकर सीओ रुक्मिणी के दफ्तर पहुंची और बिलखने लगी।
इस पर सीओ दफ्तर की महिला सिपाहियों ने गोद से बच्ची को अपनी गोद में लिया और पूनम को संभाला। रोते हुए पूनम ने बताया किउसकी शादी करीब एक साल पहले हुई थी। उसने 31 दिसंबर को सीएचसी कोंच में प्रसव के दौरान एक बच्ची को जन्म दिया था। जबकि ससुराल वाले बेटे की आस लगाए हुए थे। पति मजदूरी करता है।
बच्ची पैदा होने की जानकारी मिलते ही ससुराल वाले उस पर ताने कसने लगे। दो दिन पहले वह अस्पताल से जब बच्ची लेकर ससुराल पहुंची तो ससुराली भला बुरा कहने लगे। पति बलवीर रायकवार, जेठ ठाकुर, सास प्रेमादेवी तो इस कदर गुस्साए कि उसके साथ मारपीट कर उसे घर से ही निकाल दिया। मायकेवाले समझाने आए तो उनके साथ भी मारपीट की। घर से निकाले जाने के बाद पूनम अपने मायके ग्राम गोपालपुरा थाना माधौगढ़ में रह रही है। पूनम की आपबीती सुनकर सीओ ने एसओ कैलिया को जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
सीओ रुक्मिणी वर्मा का कहना है कि यदि पूनम की शिकायत सही मिली तो उसके ससुरालियों को बख्शा नहीं जाएगा। पता नहीं क्यों कुछ लोग बेटियों को अभिशाप समझते हैं। हैं।