कोर्ट ने सोमवार पत्नी के हत्यारे को उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माना सुनाया है। वहीं विवाहिता की सास को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। इटावा के मिटैटी टोला निवासी हत्यारे पति को कोर्ट ने सोमवार को उम्रकैद सुनाई है। विवाहिता का शव ससुराल में फांसी पर लटका मिला था।
पति व सास के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा चला। साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने सास को बरी कर दिया और हत्या के दोषी पति को सजा सुनाते हुए 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। राज्य सरकार की ओर से मामले में पैरवीकर्ता सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दंड संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि मैनपुरी जिले के खरगजीत नगर निकट ऋषि आश्रम निवासी रमेश बाबू तिवारी ने कोतवाली में तहरीर दी थी।
इसमें बताया था कि उन्होंने अपनी पुत्री रमिता दुबे (31) की शादी शहर के मिटैटी टोला निवासी आशीष दुबे के साथ 29 जनवरी 2007 को की थी। शादी के बाद से बेटी के पति, सास, दो ननदें व नंदोई दहेज को लेकर प्रताड़ित करने लगे। बेटी का घर न उजड़े, इस खातिर उक्त लोगों को कई बार समझाया। लेकिन ये लोग हरकत से बाज नहीं आए।
30 दिसंबर 2015 को फोन पर उन्हें सूचना मिली कि उनकी पुत्री ससुराल के घर के एक कमरे में पंखे से लटकी है। पत्नी व बेटों के साथ वे मौके पर पहुंचे। यहां उन्हें उनकी पुत्री का शव डबल बेड के ऊपर लगे पंखे से लटका मिला। गले में साड़ी का फंदा था। साथ ही मुंह में रुमाल ठूंसा गया था और ऊपर से एक गमछा बंधा था।
कोतवाली पुलिस ने उनकी तहरीर पर पति आशीष दुबे समेत सास व दोनों ननदों व उनके पतियों के खिलाफ रमिता की हत्या कर फांसी पर लटका देने का मामला धारा 302 व 498 में दर्ज किया। विवेचना करने के बाद पुलिस ने पति व सास के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र प्रस्तुत किया। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक विवेक त्रिपाठी ने साक्ष्यों व गवाहों के बयानों के आधार पर आशीष दुबे को दोषी पाया और सास को बरी कर दिया।
झूठ बोलकर कर ली थी शादी
कोर्ट का निर्णय आने के बाद मैनपुरी जिला निवासी मृतका के अध्यापक भाई विनीत ने बताया कि बहन रमिता की शादी से पहले लड़के वालों ने झूठ बोला था। उन्हें बताया गया था कि लड़का (आशीष) पोस्ट ऑफिस में बाबू है। जबकि यह बात झूठी निकली। वह इधर उधर प्राइवेट जॉब करता था। उसकी बहन के दो बच्चे हुए, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। कोर्ट के निर्णय से उन्हें संतुष्टि मिली है।