सांत्वना देने के नाम पर किया था अगवा
पुलिस की जांच में सामने आया कि किशोरी नाराज होकर घर से चली गई थी। इसी दौरान चांदनी की उस पर नजर पड़ी। उसने उससे बातचीत शुरू कर सांत्वना दी। घरवालों के खिलाफ भड़काया और मदद करने का आश्वासन दिया। किशोरी उसके झांसे में आ गई थी। उसके बाद चांदनी व उसका पति इकबाल उसको लेकर चले गए थे।
50 हजार में किया था किशोरी का सौदा
इकबाल व चांदनी ने किशोरी को नत्थूलाल को बेचा था। इसके एवज में 50 हजार रुपये लिए थे। पूछताछ में नत्थूलाल ने बताया कि उसने अपने बेटे के लिए किशोरी को खरीदा था। सवाल है कि पुलिस ने उसके बेटे को आरोपी क्यों नहीं बनाया। उच्चाधिकारियों का कहना है कि केस की विवेचना जारी है।
किशोरी की समझदारी से पकड़ा गया गिरोह
पुलिस तो हाथ पर हाथ धरे बैठी थी। खुलासे के पीछे मुख्य भूमिका पीड़ित किशोरी की है। उसी ने एक दिन अपने परिजनों को किसी तरह फोन कर बताया कि वह एटा में है। तब पता चला कि वह इन आरोपियों के चुंगल में है। परिजनों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस नंबर ट्रेस कर आरोपियों तक पहुंची।