कानपुर देहात। जिले में घनी आबादी क्षेत्र में घरों के ऊपर से निकलीं एचटी लाइन (हाईटेंशन लाइन) से जिंदगियों पर करंट का खतरा है। लाइन शिफ्ट करने के बजाय जिम्मेदार आश्वासन की घुट्टी पिला रहे हैं। ऐसे में लोग डर के बीच रहने को मजबूर हैं।
जिले में अकबरपुर, रूरा, रनियां, पुखरायां आदि नगरीय क्षेत्र में बिजली आपूर्ति के लिए सुदृढ़तंत्र नहीं हैं। घनी बस्तियों में जर्जर बिजली तार तो आम हैं। वहीं घरों के ऊपर से निकली एचटी लाइनों तक को शिफ्ट करने में जिम्मेदार रुचि नहीं ले रहे हैं। हालात ये हैं कि किस नगर में ऐसी कितनी लाइनें हैं और वैकल्पिक लाइन का इंतजाम किस तरह होगा इसको लेकर कोई पहल नहीं हो रही है। लोग करंट के खतरे के बीच घरों में रह रहे हैं। घरों के थोड़ी ही ऊपर से या फिर भवन को छूकर एचटी तार निकले हैं। रूरा में तो घरों की छत पर इंसुलेटर बंध लगाकर एचटी लाइन निकाली गई है। लोगों का कहना है कि बारिश में करंट से झटके लगते हैं। बिजली निगम को शायद हादसे का इंतजार है।
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केस एक :
घरों के ऊपर व बरामदे से होकर निकली एचटी लाइन
अकबरपुर में एआरटीओ कार्यालय के पास बस्ती में बारा उपकेंद्र से पतारी गांव को जाने वाली एचटी लाइन घरों के ऊपर से निकली है। कई घर दो मंजिला है तो तार कई घर के बरामदे से होकर निकले हैं। खतरनाक तरीके से निकली बिजली लाइनों से करंट का खतरा बना है।
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केस दो :
छत के ऊपर से इंसुलेटर लगाकर निकाली एचटी लाइन
रूरा में पाथामाई गली में एचटी लाइन घरों के ऊपर से निकली हैं। कई मकानों पर बिजली कर्मियों ने इंसुलेटर लगा दिए हैं। बारिश में इन घरों में करंट उतरने पर झटके लगते हैं। बिजली गिरने से इसी बस्ती में ट्रांसफार्मर फटने की घटना बीते साल हो चुकी है। फिर भी निगम बिजली लाइन शिफ्ट करने में रुचि नहीं ले रहा है।
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केस तीन
रूरा में उपकेंद्र के करीब तिगाईं फीडर की एचटी लाइन घरों के ऊपर से होकर निकली है। करीब दो साल पहले बरामदे में सूखने के लिए डाले गए कपड़े उठाने के दौरान एक किशोर की करंट लगने से मौत हो चुकी है। लाइन शिफ्ट कराने की मांग हो रही है लेकिन बिजली कर्मी अनदेखी किए हैं।
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घरों के ऊपर या फिर किसी के निजी परिसर से निकली बिजली लाइनों को चिन्हित करने के निर्देश संबंधित जेई को दिए गए हैं। रूरा में कुछ बिजली लाइनें चिह्नित कराई गई हैं। बिजनेस प्लान 2026-27 में इनका प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। बजट मिलने पर लाइनें शिफ्ट कराई जाएगी। - सुमित व्यास, अधीक्षण अभियंता