छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के जैव विज्ञान विभाग में बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर ठोस अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन को लेकर कार्यशाला का आयोजन हुआ। एमएससी (बायोटेक) के प्रथम वर्ष के छात्रों ने सब्जी के छिलकों से बायोगैस बनाने का मॉडल प्रस्तुत किया।
इसमें 10 लीटर गोबर और दो किलो छिलकों को पानी के साथ मिलाकर एक प्लास्टिक के बर्तन में सात दिन तक रखते हैं। सात दिन तक गोबर इन छिलकों को सड़ाता है, जिससे कार्बन डाई ऑक्साइड और मीथेन गैस उत्पन्न होती है। कार्बन डाई ऑक्साइड को मीथेन से अलग कर बायोगैस प्राप्त किया जाता है।
इस प्लांट से एक बार में आधा लीटर गैस प्राप्त की जा सकती है
मॉडल बनाने वाले आशुतोष, उमेश, इकरम और हरप्रीत ने बताया कि इस प्लांट से एक बार में आधा लीटर गैस प्राप्त की जा सकती है। वहीं, एमएससी (बॉयोटेक) के द्वितीय वर्ष के छात्रों ने उर्वरक, मिट्टी, गोबर, सूखे पत्ते और केंचुओं को मिलाकर वर्मी कंपोस्ट खाद बनाई, जिसका उपयोग मिट्टी को उर्वरक बनाने के रूप में किया जाता है।
आईआईटी के प्रोफेसर विनोद तारे ने बताया कि घरों में सूखे और नमी युक्त कूड़े के लिए दो विभिन्न कूड़ेदानों का प्रयोग करके हम पहला कदम उठा सकते हैं। विभागाध्यक्ष वर्षा गुप्ता ने बताया कि नोबेल पुरस्कार पाने वाले वैज्ञानिक सर सीवी रमन की याद में भारत में हर वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईआईटी के प्रोफेसर विनोद तारे, महापौर प्रमिला पांडेय, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता, कुलसचिव विनोद कुमार सिंह आदि लोग मौजूद रहे।