केंद्रीय गंगा संरक्षण मंत्रालय के सचिव शशि शेखर ने सोमवार को एसटीपी स्थित दफ्तर में बैठक कर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी टीयू खान से पूछा कि शहर में कितनी वैध और अवैध टेनरियां हैं? उनसे कितना गंदा पानी निकलता है? क्षेत्रीय अधिकारी इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।
बैठक के दौरान उन्होंने विशेष सचिव (पर्यावरण) अजय शुक्ला, जल निगम के एमडी ए आशुदानी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सीएलआरआई के अधिकारियों से टेनरियों से निकलकर गंगा में जा रहे गंदे पानी के समाधान के उपाय पूछे। बैठक में स्पष्ट कहा कि जब तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सख्ती से काम नहीं करेगा, तब तक गंगा को गंदा होने से नहीं रोक सकते। कहा कि वे अवैध टेनरियां बंद कराएं। सीवर लाइनों को पंचर करने वालों पर एफआईआर दर्ज कराई जाए। टेनरी संचालकों से प्राइमरी ट्रीटमेंट प्लांट हर हाल में चलवाया जाए।
शशि शेखर के सवाल पर टीयू खान ने बताया कि यहां 402 टेनरियां हैं, इनमें से 236 ही चल रही हैं। इस पर सचिव ने उनसे गारंटी लेने के लिए कहा कि सभी बंद हैं तो क्षेत्रीय अधिकारी ने गारंटी लेने से इनकार कर दिया। कहने लगे कि यहां निकल रहे टेनरी वेस्ट में से 80 प्रतिशत 20 बड़ी टेनरियों से ही आता है। सीएलआरआई के अफसरों ने कहा कि यहां 60 प्रतिशत गंदा पानी 50 बड़ी टेनरियों से ही आता है। सचिव ने सही रिपोर्ट देने की बात कहते हुए कि कहा कि यदि 50 बड़ी टेनरियों का संचालन ठीक से हो तो दिक्कत कम हो सकती है।