लड़की ने प्यार के खातिर अपने पिता को फंसाने में कतई गुरेज नहीं किया और अपने प्रेमी के साथ मिलकर पिता को जेल पहुंचाने की साजिश रच डाली। उरई चुर्खी के नूरपुर में वृद्ध की हत्या किसी और ने नहीं बल्कि पड़ोसी की बेटी ने ही अपने प्रेमी से कराई थी।
किशोरी वृद्ध की हत्या के आरोप में अपने पिता को फंसाना चाहती थी। इसलिए उसने शव के पास पिता के नाम का खत व उनकी फोटो रख दी थी, जिससे पुलिस का शक सीधा उसके पिता पर जाए। मंगलवार को पुलिस लाइन सभागार में एएसपी सुरेंद्र नाथ तिवारी ने मामले की खुलासा किया।
हत्याकांड का खुलासा करते हुए एएसपी सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि नूरपुर गांव निवासी भगवान सिंह (65) की शुक्रवार की रात हत्या कर दी गई थी। तब भगवान के बेटे रामकेश ने सगे भाई मोहित, कल्लू पुत्र छोटे और सगे भाई सुल्तान व मलखान पुत्र मगन के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू की तो रविवार शाम पुलिस के हाथ कुछ अहम सुबूत लगे। जिसके आधार पर पुलिस ने पड़ोसी देवी दयाल के बेटी किरन (17) व उसके प्रेमी रामबाबू विश्वकर्मा पुत्र चरन सिंह निवासी चिल्ली थाना राठ हमीरपुर को गिरफ्तार किया था।
रामबाबू सोमवार को चुर्खी थाने से मुंशी को धक्का देकर भाग निकला था, लेकिन देर शाम पुलिस ने उसे जंगल से गिरफ्तार कर लिया। एएसपी ने बताया कि भगवान के पड़ोसी देवी दयाल ने अपनी बेटी किरन की शादी कानपुर देहात के सिकंदरा में तय की थी। किरन को यह रिश्ता पसंद नहीं था।
वह प्रेमी रामबाबू से शादी करना चाहती थी। इसलिए पिता को रास्ते से हटाने के लिए उसने पड़ोसी वृद्ध भगवान की हत्या की साजिश रची। किरन ने प्रेमी रामबाबू से वृद्ध की हत्या करा दी और पिता देवी दयाल को फंसाने के लिए उसके नाम लिखी चिट्ठी व उसकी फोटो शव के पास रख दी, जिससे हत्या का शक सीधा पिता पर जाए। लेकिन शुरू से ही यह मामला काफी पेचीदा लग रहा था।
पूजा की कॉल डिटेल और हत्या के बाद रामबाबू का अचानक गांव से भागना संदेह पैदा कर रहा था। पुलिस ने आरोपी किशोरी व उसके प्रेमी के खिलाफ कार्रवाई कर दोनों को जेल भेज दिया है। इस दौरान सीओ कालपी सुबोध गौतम भी मौजूद रहे।
गांव में हुए विवाद से मिला हत्या का तरीका
नूरपुर में कुछ दिनों पूर्व दो पक्षों में विवाद हो गया था। एक पक्ष ने दूसरे पक्ष को फंसाने के लिए उसके नाम का लेटर व फोटो मौके पर छोड़कर एक वृद्ध की हत्या की कोशिश की थी, जिसमें वह वृद्ध आज भी ग्वालियर में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। किरन ने इस घटना को काफी गहनता से समझा और पिता को फंसाने के लिए वहीं तरीका अपनाया।
गोलगप्पे के ठेले से शुरू हुई प्रेम कहानी
आरोपी रामबाबू कुछ माह पहले गांव से नूरपुर अपनी बहन के घर रहने आया था। उसकी बहन का घर किरन के घर से कुछ दूर था। रामबाबू ने गांव में गोलगप्पे का ठेला लगाना शुरू कर दिया, जहां किरन रोजाना गोलगप्पे खाने जाया करती थी। बस यहीं से दोनों के बीच प्रेमी कहानी शुरू हो गई। इसके बाद दोनों फोन पर बात करने लगे।
पिता व भाई ने किया था विरोध
किरन के पिता देवीदयाल व उसके भाई को इनके प्रेम संबंध के बारे में पता चल गया था। तब उन्होंने किरन का मोबाइल छीन लिया और उसका घर से निकलना बंद करा दिया। रामबाबू ने किसी तरह दूसरे मोबाइल का इंतजाम किया और किरन के पास पहुंचाया। लेकिन पिता व भाई किरन पर नजर रखे थे। उधर किरन पिता के तय किए गए रिश्ते से नाराज थी। वह रामबाबू से शादी करना चाहती थी, जिससे उसने पिता देवीदयाल को फंसाकर रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया।