हालांकि खाना बनाने व बकरी बांधने का काम इस क्षतिग्रस्त हिस्से में ही किया जाता था। बेटे आरजू आलम, साहिबे आलम, जुनैद, साहिल, आजम व बेटी राना बानो का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। हादसे की सूचना पाकर प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह व नायब तहसीलदार दीपक गौतम ने गांव पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और हादसे की जानकारी अधिकारियों को दी। प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया परिवार के लोगों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया।
पुराने मकान पर दूसरी मंजिल का मकान बनाया गया था
ग्रामीणों ने बताया 50 साल पहले बने मकान पर लगभग 13 वर्ष पहले दूसरी मंजिल का निर्माण कराया गया था। जिससे नीचे बने मकान पर दबाव होने के चलते क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके चलते उसमें कोई रहता नहीं था, फिर भी गृहस्थी का सामान उसमें रखा रहता था। परिजन जल्दी ही इस मकान को तुड़वाने वाले थे, लेकिन उसके पहले ही यह हादसा हो गया।