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Kanpur News: आठ जिलों के अस्पतालों का कचरा ढेर सारा पर मशीनें खटारा

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माई सिटी रिपोर्टर
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कानपुर। कानपुर समेत आठ जिलों के हजारों अस्पतालों से निकलने वाले जैविक कचरे का बोझ मेडिकल पाल्यूशन कंट्रोल कमेटी (एमपीसीसी) में लगी खटारा मशीनें (इंसीनेटर) नहीं उठा पा रही हैं। इसके चलते भौंती स्थित प्लांट में खुले में जैविक कचरे का ढेर लगा है। बिठूर स्थित विलवर्ल्ड कंपनी में भी जैविक कचरे का समुचित निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इसके चलते उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने शुक्रवार को दोनों कंपनियों को नोटिस जारी किया है।
बुधवार को महापौर प्रमिला पांडेय और नगर आयुक्त सुधार कुमार की अध्यक्षता में नगर निगम सभागार में अस्पतालों से निकलने वाले जैविक कचरे के निस्तारण के संबंध में बैठक हुई थी। इसमें सामान्य कूड़े के साथ मेडिकल कचरा फेंके जाने पर महापौर ने नाराजगी जताई थी। इसके अगले दिन ही पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारियों ने दोनों कंपनियों के प्लांट का निरीक्षण किया। एमपीसीसी प्लांट में कानपुर नगर, कानपुर देहात, औरैया, उन्नाव, कन्नौज, इटावा, फतेहपुर और हमीरपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों, पैथोलॉजी और क्लीनिक के जैविक चिकित्सा अपशिष्ट (बायो मेडिकल वेस्ट) को इकट्ठा कर उनका निस्तारण किया जाता है। कंपनी के 14 वाहन प्रतिदिन मेडिकल वेस्ट प्लांट लाते हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को कई साल पुरानी मशीनें लगी मिलीं। एमपीसीसी में लगा इंसीनेटर निर्धारित क्षमता से कम पर चलता मिला। कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि प्लांट के अपग्रेडेशन का काम शुरू करा दिया गया है। जल्द ही नई मशीनें लगाई जाएंगी। इसके अलावा प्लांट में जल शोधन के लिए लगा ईटीपी प्लांट बंद मिला। पता चला कि इसकी मोटर खराब है। प्लांट के सुपरवाइजर प्रीतम प्लास्टिक वेस्ट के निस्तारण संबंधी दस्तावेज नहीं दिखा सके। कमोबेश यही स्थित विलवर्ल्ड की भी मिली।
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पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी अजीत कुमार सुमन ने बताया कि क्षमता से अनुरूप वेस्ट का निस्तारण न होने से प्लांट में मेडिकल कचरा डंप है।कमियां मिलने पर दोनों कंपनियों को नोटिस जारी कर सुधार के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद अधिकारी फिर निरीक्षण करेंगे। सुधार न मिलने पर दोनों कंपनियों पर मुख्यालय स्तर से जुर्माना लगाने समेत अन्य कार्रवाई की जाएगी।
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