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कानपुर हिरनी हादसा: चार अर्थियों के बोझ तले दबा परिवार, मुआवजे के बिना अंतिम संस्कार से इनकार

Mon, 07 Sep 2026 10:01 AM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर

सार

साढ़ थाना क्षेत्र के हिरनी गांव में दो मंजिला कच्चा मकान गिरने से एक ही परिवार के चार लोगों की मौत के बाद सोमवार सुबह गांव में मातम के साथ आक्रोश भी नजर आया। रविवार देर रात पोस्टमार्टम के बाद जब एंबुलेंस चार शवों को लेकर आधी रात के बाद हिरनी गांव पहुंची तो पूरे गांव में कोहराम मच गया।
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हिरनी मकान हादसा - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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रात के सन्नाटे में चीख-पुकार और करुण क्रंदन की आवाजें दूर तक सुनाई देती रहीं। जिस घर में बेटियों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां एक साथ चार अपनों के शव पहुंचने से हर आंख नम हो गई। सुबह होते ही परिवार के सामने अपनों को अंतिम विदाई देने की पीड़ा के साथ आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया।

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गरीबी और चार सदस्यों को खोने का गम परिवार पर पहाड़ बनकर टूट पड़ा। चार अर्थियों के लिए जुटे परिवार और ग्रामीणों के बीच प्रशासन से मदद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सुबह साढ़े आठ बजे तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

हिरनी मकान हादसा - फोटो : amar ujala

आवास मिल जाता तो शायद न आती यह नौबत

सुबह ग्राम प्रधान संजय गुप्ता जब अंतिम संस्कार की तैयारी को लेकर परिवार के पास पहुंचे तो ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। मृतक मुकेश सिंह के भाई अशोक सिंह अपने आंसू नहीं रोक सके। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते परिवार को आवास मिल गया होता तो शायद यह नौबत नहीं आती। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि हादसे के बाद से प्रशासन की ओर से मदद और कार्रवाई के आश्वासन तो दिए जा रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस आर्थिक सहायता नहीं मिली है।

मुआवजे के बिना अंतिम संस्कार से इनकार

मृतक के छोटे भाई कल्लू सिंह फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा कि परिवार ने एक साथ चार अपनों को खोया है और अब उनके सामने अंतिम संस्कार का भी संकट है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को ठोस आर्थिक मदद नहीं मिलती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

हिरनी मकान हादसा - फोटो : amar ujala
गांव में एक तरफ चार मौतों का मातम है तो दूसरी तरफ परिवार की मदद को लेकर आक्रोश। ग्रामीणों का कहना है कि जिस परिवार ने अपना सब कुछ खो दिया, उसे अब सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि तत्काल आर्थिक सहायता की जरूरत है। सुबह तक गांव में प्रशासनिक अधिकारियों के नहीं पहुंचने से लोगों में नाराजगी बनी रही।
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आधी रात चार शव पहुंचे गांव

रविवार रात जब एक के बाद एक चार शव गांव पहुंचे तो परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। जिस आंगन में कुछ दिन पहले तक बेटियों की आवाजें गूंजती थीं, उसी आंगन में चार शव रखे थे। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर गांव के लोगों की आंखें भी नम हो गईं। अब परिवार की मांग है कि अंतिम संस्कार से पहले उसे ऐसी मदद दी जाए, जिससे इस मुश्किल घड़ी में परिवार को कुछ सहारा मिल सके।

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