रात के सन्नाटे में चीख-पुकार और करुण क्रंदन की आवाजें दूर तक सुनाई देती रहीं। जिस घर में बेटियों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां एक साथ चार अपनों के शव पहुंचने से हर आंख नम हो गई। सुबह होते ही परिवार के सामने अपनों को अंतिम विदाई देने की पीड़ा के साथ आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया।
आवास मिल जाता तो शायद न आती यह नौबत
सुबह ग्राम प्रधान संजय गुप्ता जब अंतिम संस्कार की तैयारी को लेकर परिवार के पास पहुंचे तो ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। मृतक मुकेश सिंह के भाई अशोक सिंह अपने आंसू नहीं रोक सके। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते परिवार को आवास मिल गया होता तो शायद यह नौबत नहीं आती। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि हादसे के बाद से प्रशासन की ओर से मदद और कार्रवाई के आश्वासन तो दिए जा रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस आर्थिक सहायता नहीं मिली है।
मुआवजे के बिना अंतिम संस्कार से इनकार
मृतक के छोटे भाई कल्लू सिंह फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा कि परिवार ने एक साथ चार अपनों को खोया है और अब उनके सामने अंतिम संस्कार का भी संकट है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को ठोस आर्थिक मदद नहीं मिलती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
आधी रात चार शव पहुंचे गांव
रविवार रात जब एक के बाद एक चार शव गांव पहुंचे तो परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। जिस आंगन में कुछ दिन पहले तक बेटियों की आवाजें गूंजती थीं, उसी आंगन में चार शव रखे थे। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर गांव के लोगों की आंखें भी नम हो गईं। अब परिवार की मांग है कि अंतिम संस्कार से पहले उसे ऐसी मदद दी जाए, जिससे इस मुश्किल घड़ी में परिवार को कुछ सहारा मिल सके।