भाजपा के वरिष्ठ नेता और भगवंतनगर से विधायक का चुनाव जीते हृदयनारायण दीक्षित का विधानसभा अध्यक्ष बनना लगभग तय हो गया है। बुधवार को नामाकंन और निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी होगी। यह खबर मिलते ही उन्नाव के भाजपाईयों ने खुशी मनाई। उनके पैतृक गांव पुरवा तहसील के लउवा में लोगों ने मिठाई बांटी।
उन्नाव पुरवा तहसील के हिलौली ब्लाक के लउवा गांव निवासी हृदयनारायण दीक्षित 1985 में पहली बार निर्दलीय चुनाव लड़े और जनता ने उनके सिर जीत का सेहरा बंधा। वह 1989 जनतादल, 1991 में जनता पार्टी और 1993 में सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर पुरवा के विधायक बने। इसबार के चुनाव में भाजपा ने टिकट देकर भगवंतनगर सीट से चुनाव मैदान में उतारा।
जनता ने उनके सिर जीत का सेहरा बांधा। भाजपा के पूर्ण बहुमत से चुनाव जीतने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा हृदयनारायण दीक्षित को डिप्टी सीएम या कैबिनेट मंत्री बनाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद से जिले के लोगों में मायूसी रही। लेकिन मंगलवार को जैसे ही भाजपा ने उनका नाम विधानसभा अध्यक्ष के लिए घोषित किया जिले के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। राजनीतिक गलियारों में भाजपा के इस दांव की खासी चर्चा है।
राजनीति से जुड़े लोगों का मानना है कि विधानसभा अध्यक्ष के लिए ब्राह्मण चेहरा देकर भाजपा ने दूरगामी परिणाम की पटकथा लिखने की तैयारी शुरू की है। मालूम हो कि इससे पहले हृदयनारायण दीक्षित सपा-बसपा गठबंधन की सरकार में 1995 में संसदीय कार्य एवं पंचायतीराज मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2010 से जून 2016 तक भाजपा के विधान परिषद सदस्य और भाजपा के नेता विधायक दल रहे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रवक्ता बनाया।
पुरवा सीट से कब-कब जीते
1985-निर्दलीय
1989-जनता दल
1991-जनता पार्टी
1993-सपा , -अबकी बार (2017) भाजपा के टिकट से भगवंतनगर सीट से चुनाव जीते