हिंदू कन्या को विदा करते नसीर अहमद सिद्दीकी व उनकी पत्नी
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बुंदेलखंड का सांप्रदायिक सौहार्द देश की राजधानी दिल्ली में भी दिख रहा है। ताजा उदाहरण अक्षय तृतीया पर अनाथ हिंदू कन्या का विवाह बांदा के मूल बाशिंदे और पेशे से अध्यापक मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ता ने कराया।
बांदा के बाशिंदे नसीर अहमद सिद्दीकी दिल्ली सरकार के विद्यालय में अध्यापक हैं। पत्नी और बच्चों के साथ वहीं रहते हैं। वे अखिल भारतीय बुंदेलखंड विकास मंच के महासचिव भी हैं। बुधवार को उन्होंने एक और नायाब काम कर बुंदेलखंड का नाम दिल्ली में रोशन किया। दिल्ली के छतरपुर स्थित शिवालय में अनाथ कन्या पुष्पा का विवाह धूमधाम से कराया।
उनकी पत्नी नजमी बानो ने भी पूरी भूमिका अदा की। बताया जाता है कि पुष्पा जब 14 वर्ष की थी तभी उसके पिता मनोज कुमार झा का देहांत हो गया था। मां लक्ष्मी पर पुष्पा समेत तीन बच्चों के पालने की जिम्मेदारी आ गई। महिला जागरूकता कैंप में लक्ष्मी की मुलाकात सिद्दीकी की पत्नी नजमी से हुई।
नजमी ने उसे कुछ घरों में खाना बनाने का काम दिला दिया। लक्ष्मी यह काम कर तीनों बच्चे पालने लगी। उसके बच्चों की शिक्षा का जिम्मा स्वयंसेवी संगठन सोशल आर्गनाइजेशन फॉर कम्युनिटी हेल्प (सोच) ने संभाला। अक्षय तृतीया पर बुधवार को दिल्ली के एक कम्युनिटी सेंटर में लक्ष्मी की पुत्री पुष्पा का धूमधाम से विवाह हुआ। सिद्दीकी और उनकी पत्नी ने अभिभावक की पूरी भूमिका निभाई।