आधुनिक हिंदी के उन्नायक भारतेंदु हरिश्चंद्र की बुधवार को जयंती पर साहित्य प्रेमियों ने उन्हें याद किया और अतीत के झरोखों से निकल आया उनका कानपुर से रिश्ता। कानपुर में भारतेंदु हरिश्चन्द्र के अनन्य प्रशंसकों में से थे प्रताप नारायण मिश्र। वह न सिर्फ उनके लिखे नाटकों का मंचन करवाते थे, बल्कि उनमें अभिनय भी करते थे।
भारतेंदु के लिखे एक नाटक में अभिनय के लिए उन्होंने अपनी मूंछ तक साफ करवा दी थी। भारतेंदु ने नाटकों से देशप्रेम की अलख जगाई व अन्य रचनाओं से हिंदी के प्रति रुझान को बढ़ाने में महती भूमिका निभाई। हिंदी के प्रति अगाध प्रेम भारतेंदु हरिश्चन्द्र की इन पंक्तियों से प्रकट होता है, 'निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिनु निज भाषा के ज्ञान के, मिटत न तन को सूल।'