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Kanpur News: हाईकोर्ट ने तकनीकी चूक पर माल की जब्ती रद्द की

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कानपुर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 30 जुलाई 2025 को शकुंतलम एसोसिएट्स के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। इसमें माल और सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत तकनीकी चूक पर माल की जब्ती को रद्द कर दिया गया। यह मामला जीएसटी अधिनियम की धारा 129(3) के तहत प्रक्रियात्मक नियमों से संबंधित था जहां ई-वे बिल में परिवहनकर्ता का नाम न होने के कारण माल को जब्त किया गया था।
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शकुंतलम एसोसिएट्स का माल दिल्ली ले जाया जा रहा था। माल के साथ आवश्यक दस्तावेज जैसे कर चालान, ई-वे बिल और बिल्टी मौजूद था लेकिन ई-वे बिल में परिवहनकर्ता का नाम शामिल नहीं था। इस आधार पर जीएसटी अधिकारियों ने माल को जब्त कर लिया। इसके अतिरिक्त ट्रक चालक के प्रारंभिक बयान में माल का गंतव्य गाजियाबाद बताया गया जो दस्तावेजों में उल्लेखित दिल्ली से भिन्न था। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि चालक का बयान चिकंबरपुर के रास्ते से गुजरने के कारण था जहां परिवहन कंपनी का गोदाम पूर्ण ट्रक लोड लॉजिस्टिक्स प्रबंधन के लिए था।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि परिवहनकर्ता का नाम न होना एक तकनीकी चूक थी और कर चोरी का कोई इरादा नहीं था। कर दस्तावेजों में गंतव्य दिल्ली के रूप में सही ढंग से उल्लेखित था। दूसरी ओर प्रतिवादियों ने दावा किया कि ई-वे बिल में परिवहनकर्ता का नाम न होना एक प्रक्रियात्मक उल्लंघन था। उन्होंने कहा कि चालक के बयान में गाजियाबाद का उल्लेख होने के बावजूद याचिकाकर्ता ने मार्ग को स्पष्ट करने के लिए कोई समर्थक दस्तावेज प्रदान नहीं किया। न्यायालय ने रिकॉर्ड की जांच की और पाया कि कर चोरी का कोई ठोस सबूत नहीं था। लेनदेन पूरी तरह से दस्तावेजीकृत था। परिवहनकर्ता का नाम न होना धारा 129 के तहत जुर्माना लगाने के लिए पर्याप्त नहीं था। न्यायालय ने एम/एस वरुण बेवरेजेज लिमिटेड बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और सहायक आयुक्त (एसटी) बनाम एम/एस सत्यम शिवम पेपर्स प्राइवेट लिमिटेड के मामलों का हवाला दिया। इनमें यह स्पष्ट किया गया था कि कर चोरी के इरादे के बिना प्रक्रियात्मक चूकों के लिए जुर्माना नहीं लगाया जाना चाहिए। इसके आधार पर 30 अप्रैल, 2021 और 23 अक्तूबर 2021 के प्रतिवादियों के आदेशों को रद्द कर दिया गया और याचिका स्वीकार की गई।
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कानपुर सीएएस सीपीई स्टडी सर्किल के संयोजक सीए प्रशांत रस्तोगी और उपसंयोजक सीए नितिन सिंह ने बताया कि यह फैसला जीएसटी नियमों में स्पष्टता लाता है। तकनीकी त्रुटियों पर जुर्माना लगाने से पहले कर चोरी का इरादा सिद्ध करना आवश्यक है। यह व्यवसायों के लिए भरोसा बढ़ाता है और जीएसटी अनुपालन को और अधिक पारदर्शी बनाता है। यह फैसला कारोबारियों के लिए राहत देता है। खासकर उन मामलों में जहां तकनीकी चूकों के कारण माल की जब्ती होती है लेकिन कर चोरी का कोई इरादा नहीं होता। यह फैसला सुनिश्चित करता है कि जुर्माना केवल उन मामलों में लगाया जाए जहां स्पष्ट उल्लंघन या कर चोरी का इरादा हो।
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