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हाईकोर्ट कि रोक, फिर भी छात्रसंघ चुनाव

Thu, 01 Sep 2016 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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बीएनडी कालेज में नामांकन के बाद कुछ यूं रहा नजारा (फाइल फाेटाे)
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कानपुर यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव कराने पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की रोक है, फिर भी शासन ने चुनाव कराने का आदेश जारी कर दिया। यहां बीएनडी कॉलेज में चुनाव कराया भी जा रहा है। इस पर कुछ कॉलेजों ने आपत्ति जताई है। कानपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी चुनाव कराने पर रोक से संबंधित हाईकोर्ट का आदेश बुधवार को वेबसाइट www.kanpuruniversity.org और कॉलेजों की लॉगिन पर उपलब्ध करा दिया है। यह रोक पीपीएन डिग्री कॉलेजों की याचिका (संख्या 7712/2012) पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लगाई थी। 
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वर्ष 2012 के दौरान पीपीएन कॉलेज ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों के हिसाब से छात्रसंघ चुनाव कराने का फैसला किया था। इसके तहत 100 स्टूडेंटों पर एक प्रतिनिधि चुना जाना था। प्रतिनिधि को ही अपना अध्यक्ष, महामंत्री का चुनाव करना था। इसका स्टूडेंटों ने विरोध किया और बवाल भी काटा। इसी मामले पर पीपीएन पीजी कॉलेज हाईकोर्ट चला गया। लखनऊ  हाईकोर्ट के जस्टिस उमानाथ सिंह और जस्टिस वीरेंद्र कुमार दीक्षित ने मामले की सुनवाई की और 13 सितंबर 2012 को पीपीएन कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव कराने पर रोक का आदेश पारित कर दिया। हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि सीएसजेएम यूनिवर्सिटी से संबद्ध अन्य कॉलेजों में भी चुनाव नहीं कराए जाएंगे। हाईकोर्ट का आदेश कानपुर यूनिवर्सिटी को मिल चुका है। कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन का कहना है कि हाईकोर्ट और शासन का आदेश कॉलेज लॉगिन पर उपलब्ध करा दिया गया है। चुनाव कराने पर रोक है। कानपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में चुनाव नहीं कराया जाएगा। ऐसा हुआ तो हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन होगा। बताते चलें कि हाईकोर्ट के आदेश की वजह से पीपीएन, डीएवी, डीबीएस, डीजी, हलीम, हरसहाय, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, महिला महाविद्यालय, एएनडी, एसएनसेन कॉलेज, ज्वाला देवी, कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय और जुहारी देवी गर्ल्स पीजी कॉलेज में चुनाव नहीं कराया जा रहा है। वहीं बीएन कालेज के ‌प्र‌िंस‌िपपिल  डॉ. विवेक द्विवेदी ने हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं हाोने की बात कही। उनका कहना है ‌क‌ि शासन ने चुनाव कराने का आदेश दिया था। वह इसका अनुपालन करा रहे हैं। उन्हाेंने हाईकोर्ट के आदेश का गुरुवार को अध्ययन कराकर कानूनी सलाह लेने की बात कही। 
                                                                                                                                                                                       
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