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500 में पांच ही जानते हैं शुगर धुंधली कर रही आंख, अधिकांश लोग इस खतरे से अंजान

Tue, 27 Nov 2018 11:58 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- नेत्र रोग विशेषज्ञों ने डायबिटीज डे पर की स्क्रीनिंग
- ज्योति से ज्योति जलाओ अभियान का पहला चरण
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विस्तार
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डायबिटीज की गिरफ्त में आए पांच सौ रोगियों में सिर्फ पांच को ही पता है कि हाई ब्लड शुगर आंखों की रोशनी को धुंधली कर रही है। अधिकांश लोग हाई ब्लड शुगर के खतरों से अब भी अंजान हैं, वे इस पर ध्यान ही नहीं देते जब तक आंख से दिखने में दिक्कत नहीं होती।
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यह तथ्य कानपुर में इंडियन ऑफ्थेमोलोजिकल सोसाइटी (आईओएस) के ज्योति से ज्योति जलाओ अभियान के तहत हुई स्क्रीनिंग में पता चला है। 14 नवंबर को डायबिटीज डे के मौके पर नेत्र रोग विशेषज्ञों ने शिविरों का आयोजन करके स्क्रीनिंग की। इनके आंकड़े अब संकलित किए गए हैं। 

ज्योति से ज्योति जलाओ अभियान का पहला चरण स्क्रीनिंग का है। परेशानी में डालने वाली बात यह है कि इस दिन पांच हजार से अधिक लोगों ने अलग-अलग जगहों पर अपनी आंखों की जांच कराई। इनमें से एक चौथाई लोग ऐसे रहे हैं जिनकी आंखों में हाई ब्लड शुगर का दुष्प्रभाव पड़ने लगा है जिससे डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण उजागर होने लगे। इसके बावजूद लोग अंजान हैं।
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डेमो पिक
यूपी स्टेट आफ्थेलमोलोजिकल सोसाइटी के पूर्व सचिव डॉ. मलय चतुर्वेदी का कहना है कि अभी पांच सौ में पांच लोग ही जागरुक हैं। ओपीडी में डायबिटिक रेटिनोपैथी की मरीजों की संख्या दिनों-दिन बढ़ रही है। मेडिकल कालेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएन कुशवाहा का कहना है कि लाला लाजपत राय अस्पताल की ओपीडी और शिविरों में सभी रोगियों की डायबिटिक रेटिनोपैथी के मद्देनजर स्क्रीनिंग कर ली जा रही है।

जिसके पास फोन उसे मिल सकता रोजगार
आईओएस के ज्योति से ज्योति जलाओ अभियान के दूसरे चरण में घर-घर जाकर लोगों की कार्निया की फोटो लेने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए लोगों के पास मोबाइल फोन होना शर्त है। उसे फोटो लेकर रेटिना रीडिंग सेंटर भेजना पड़ेगा। वहां विशेषज्ञ रेटिना की जांच करके व्यक्ति को बता देंगे कि डायबिटिक रेटिनोपैथी का खतरा पैदा हो गया है।

फोटो खींचने वाले को मानदेय की भी व्यवस्था रहेगी। इसके लिए कुशल और अकुशल होने का चक्कर नहीं रहेगा। डॉ. मलय चतुर्वेदी ने बताया कि आईओएस ने इस संबंध में खाका तैयार कर लिया है। इसे लागू किया जाना है। 
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