फरवरी 1994 में चर्चित भाजपा नेता काला बच्चा की हत्या के बाद हुए दंगे में तीन हत्याओं के आरोपी बनाए गए गिरीश बाजपेई की लड़ाई अब भाजपा लड़ेगी। भाजपाइयों का कहना है कि दो मुकदमों में वह बरी हो चुका है। एक हत्या में उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। सरकार अच्छे चाल-चलन वाले बंदियों की रिहाई समय पूर्व कर रही है। इसलिए भाजपा गिरीश बाजपेई की हाईकोर्ट में पैरवी कर पूरा खर्च उठाएगी।
भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने सोमवार को जेल पहुंचकर गिरीश बाजपेई से मुलाकात की। उससे कहा कि रिहाई के प्रयास दो स्तर पर किए जाएंगे। पहला हाईकोर्ट से जमानत कराकर रिहाई और दूसरा सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर अपील में पैरवी करना। इसमें 26 अक्टूबर को पड़ी डेट में पार्टी की तरफ से एडवोकेट संतोष शुक्ला और आकाश शुक्ला पैरवी करेंगे। राज्यपाल से मिलकर समय पूर्व रिहाई के प्रयास भी किए जाएंगे। मैथानी ने बताया कि गिरीश ने जेल से ही बीए किया, मानवाधिकार शिक्षा और फूड एंड वेजीटेबिल साइंस में डिप्लोमा लिया। वह जेल में बच्चों को शिक्षा देता है। चरित्र पंजिका में सब अच्छा है इसलिए शासन की नई व्यवस्था के अनुसार उन्होंने गिरीश को रिहा कराने का संकल्प लिया है। जेल में मुलाकात के दौरान अधिवक्ता भूपेंद्र त्रिपाठी, दीपक सिंह, विवेक त्रिपाठी, मोहित दुबे मौजूद रहे।