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हेपेटाइटिस सी का दो टेबलेट से इलाज

Fri, 15 Jan 2016 02:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का कारण बनने वाले हेपेटाइटिस सी का इलाज अब दो टेबलेट से किया जा सकता है। 95 फीसदी मामलों में समय रहते गोलियों के इस्तेमाल से हेपेटाइटिस सी के इलाज में काफी फायदा मिला है। इन गोलियों के इस्तेमाल से हेपेटाइटिस सी के शरीर पर दुष्प्रभाव तो कम होंगे ही इलाज की अवधि भी काफी कम हो जाएगी।
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बुधवार को वरिष्ठ लिवर एवं पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. वीके मिश्रा ने पत्रकारवार्ता में बताया कि भारत में हेपेटाइटिस सी का सबसे बड़ा कारण ब्लड का ट्रांसफ्यूजन (चढ़ाया जाना) है। सही तरीके से ब्लड की जांच न होने के कारण कई मरीजों में हेपेटाइटिस सी का अटैक होता है।

इस कारण पेट में पानी भर जाता है, पैरों में सूजन आने लगती है, खून की उल्टियां होने लगती हैं। ज्यादातर मामलों में इसका असर तब दिखता है जब लिवर तकरीबन आधा डैमेज हो चुका होता है। उन्होंने बताया कि लेडिपासविर 90 एमजी और डाक्लोटासविर 60 एमजी दो टेबलेट के नियमित डोज से इस बीमारी से निजात पाई जा सकती है। छह महीने की दवा का खर्च करीबन 80 हजार रुपये आता है।
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जो लिवर ट्रांसप्लांट जैसे इलाज से काफी सस्ता है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि बीमारी की शुरुआत बुखार, जोड़ों में दर्द, पीलिया आदि से होती है। अभी तक जो दवा उपलब्ध है, वह 65 फीसदी मरीजों पर ही कारगर है।
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