कल्याणपुर में सड़क पर लहूलुहान पड़े पांच साल के बच्चे को कोई बाइक सवार टक्कर मारकर चला गया था। वह तड़पता रहा। सैकड़ों लोग बगल से निकले पर किसी ने उसकी मदद नहीं की।
कराह सुन वहां से गुजर रहे इंजीनियरिंग कॉलेज के दो स्टूडेंटों ने बच्चे को गोद में उठा लिया। वह उसे पास के निजी अस्पताल लेकर भागे, जहां बिना रुपये के इलाज करने से मना कर दिया गया। बच्चे की चीखें तेज होती गईं तो वह उसे वह कल्याणपुर सीएचसी ले गए।
यहां बच्चे की मलहम पट्टी तो हुई लेकिन हालत गंभीर होने पर हैलट रिफर कर दिया गया। सीएचसी की सूचना पर पहुंची पुलिस ने संवेदनहीनता की हदें पार कर दीं। उन्होंने मदद के बजाय छात्रों से ही कह दिया कि वह बच्चे को लाएं हैं वे ही इलाज कराएं।
पुरानी शिवली रोड पर बुधवार शाम चार बजे पांच साल के इस मासूम को किसी बाइक ने टक्कर मार दी थी। बच्चे को तड़पता देख वहां से गुजर रहे महाराणा प्रताप कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के स्टूडेंट वसीम अहमद, हर्षित चौहान ने उसको गोद में उठा लिया। आसपास पूछताछ की लेकिन परिजनों का कुछ पता नहीं चला।
स्थानीय दुकानदार पवन ने एंबुलेंस को सूचना दी और स्टूडेंट घायल बच्चे को पास के एक निजी हॉस्पिटल ले गए। जहां रुपये नहीं होने के चलते प्राथमिक उपचार से भी मना कर दिया गया। इसके बाद छात्रों ने घायल बच्चे को बारासिरोही सीएचसी में भर्ती कराया, जहां से पुलिस को सूचना दी गई।
मौके पर पहुंचे रेंजर-45 के दो सिपाहियों नेे वसीम और हर्षित को ही फटकारते हुए कहा कि बच्चा तुम लोग लाए हो, इलाज भी तुम्ही कराओ हमसे कोई मतलब नहीं और लौट गए। यहां, प्राथमिक उपचार के बाद दोनों छात्र बच्चे को हैलेट ले गए। हैलट प्रशासन ने बच्चे का इलाज शुरू करने के साथ ही स्वरूप नगर पुलिस को सूचना दी। इन सब भागादौड़ी के बीच पांच घंटे लग गए बच्चे को सुचारु उपचार मिलने में।
इंस्पेक्टर कमल यादव ने स्टूडेंटों से पूरा मामला समझने के बाद कल्याणपुर पुलिस से संपर्क किया। घटना के करीब चार घंटे बाद सूचना पाकर बच्चे के माता-पिता हैलट पहुंचे और बच्चे को सीने से लगाकर फफक पड़े। बच्चे के पिता देशराज ने बताया कि उनका बेटा विनय (5) दोपहर से लापता था। इंस्पेक्टर कमल यादव ने 500 रुपये बच्चे के इलाज के लिए भी दिए।