यूपी के कानपुर में स्वास्थ्य विभाग के तीमारदारों को शव वाहन उपलब्ध कराने के दावे हवा-हवाई हैं। शासन ने सरकारी अस्पतालों में मरने वाले मरीजों को उनके घर, पोस्टमार्टम हाउस, शमशान घाट आदि स्थानों में से जहां तीमारदार चाहें, वहां पहुंचे के लिए शव वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को चार शव वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें से दो वाहन उर्सला, एक माननीय कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय और एक पुलिस लाइन में उपलब्ध कराया गया है। इसके बावजूद 7 जुलाई को हैलट में मरी उन्नाव की मासूम बालिका का शव ले जाने के लिए परिजन इमरजेंसी, वार्ड, ओपीडी, पुलिस चौकी भटकते रहे थे, पर शव वाहन नहीं मिला था। शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हैलट में एक भी शव वाहन नहीं है।
हैलट अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या ने बताया कि उनके अस्पताल में शव वाहन नहीं है। सीएमओ की तरफ से शव वाहन के लिए दिए गए नंबर अक्सर मिलते नहीं हैं। पड़ताल करने पर पता चला कि आधी अधूरी तैयारियों के साथ शुरू की गई यह व्यवस्था सफेद हाथी साबित हो रही है। किसी अस्पताल में इन वाहनों को चलाने के लिए चालक नहीं है तो कहीं अफसरशाही की वजह से वाहन नहीं मिलते।