सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर से दवाएं और जांचें लिखने वाले डॉक्टरों की खैर नहीं, शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अस्पतालों में पर्याप्त दवाएं हैं।
जो नहीं हैं उन्हें अस्पताल के प्रभारी अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर लोकल पर्चेज करने के भी निर्देश दिए गए हैं। ये बातें रविवार को स्वास्थ्य राज्य मंत्री नितिन अग्रवाल ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहीं।
स्वास्थ्य राज्य मंत्री सर्किट हाउस में विभागीय समीक्षा और व्यापारी सम्मेलन की तैयारी बैठक करने आए थे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अस्पतालों के लिए 2500 डॉक्टर मिले हैं। इनमें से 12 को कानपुर नगर में तैनात किया गया है।
डॉक्टरों की कमी को बहुत जल्द पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में दवाएं पर्याप्त हैं। यदि कोई डॉक्टर बाहर की दवाएं या जांच कराने के लिए लिखता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बशर्ते मरीज या उसके परिजन इसकी लिखित शिकायत करें। गड़बड़ी करने वाले डॉक्टरों को बख्शा नहीं जाएगा। इससे पहले नितिन अग्रवाल ने स्वास्थ्य विभाग की बैठक में विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की।
बैठक के दौरान उन्होंने केपीएम अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओंकारनाथ से अस्पताल की स्थिति के बारे में पूछा तो वे कुर्सी पर बैठे-बैठे ही बताने लगे।
इस पर नाराजगी जताते हुए उन्हें खड़े होकर बताने को कहा गया। राज्य मंत्री ने रावतपुर स्टेशन के पास एक गैराज में कई 108 एंबुलेंस खड़ी रहने पर नाराजगी जाहिर की।
इस पर उन्हें बताया गया कि एंबुलेंस संचालक कंपनी ने इस गैराज से पूरे मंडल की गाड़ियों की मरम्मत का कांट्रेक्ट किया है। इसलिए वहां पूरे मंडल की गाड़ियों की मरम्मत होती है।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक डॉ. पीएल गुप्ता, सीएमओ डॉ. आरपी यादव, डफरिन की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कमल धवन, डीटीओ डॉ. एके सक्सेना समेत सभी प्रोग्राम आफीसर शामिल रहे।