मेडिकल काॅलेज में पूर्व छात्रों ने मिलकर पुरानी यादें ताजा कीं।
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कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के वर्ष 1971 बैच पैरा क्यू आर के पुरातन छात्रों ने अपनी स्मृतियां साझा कीं। दिल्ली से आए कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील कुमार मोदी ने बताया कि एमबीबीएस में उनका प्रवेश एम्स दिल्ली में हो गया था लेकिन उसे छोड़कर जीएसवीएम में प्रवेश लिया। कभी हैलट एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल रहा है।
पैरा क्यू आर बैच के 54वें ग्रैंड रियूनियन में शिरकत करने आए पुरातन छात्रों ने शनिवार को हैलट अस्पताल के विभिन्न विभागों को देखा। मेडिकल कॉलेज कैंपस के छात्रावासों में जाकर अपने कमर देखे। इसके बाद कॉलेज के लेक्चर थिएटर एक में कार्यक्रम हुआ। हैलट के सीएमएस डॉ. सौरभ अग्रवाल ने हैलट और मेडिकल कॉलेज के विस्तार के संबंध में प्रस्ताव दिया। प्राचार्य डॉ. संजय काला ने कॉलेज में शुरू हुईं नई विशेषज्ञताओं के संबंध में बताया।
डॉ. मोदी ने कानपुर के खस्तों की बड़ी तारीफ की। बताया कि छात्र जीवन में तो रोज बीएनएसडी के सामने ठेले पर खस्ते खाने जाते थे। बीच में जब भी यहां आए तो खस्ते जरूर खाएं। डॉ. वली ने बताया कि सफियाबाद मस्जिद के पास चमनगंज में उनका ननिहाल है। पुरातन छात्रों ने बताया कि उनके बैच ने छह लाख रुपये फिक्स डिपॉजिट कर रखे हैं। इसके साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के पुस्तक आदि की व्यवस्था करते हैं। इस मौके पर डॉ. आरती लालचंदानी, डॉ. सुधीर चौधरी आदि ने विचार व्यक्त किए।
कानपुर में सफाई-यातायात बड़ी चुनौती
शाम को बिठूर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अमेरिका के फ्लोरिडा से आए डॉ. विनोद चंदोक ने कहा कि कानपुर बदला है लेकिन शहर में सफाई, यातायात बड़ी चुनौती है। लंदन से आए डॉ. हृदयेश पाठक बोले कि शहर की सड़कों में सुधार की जरूरत है। इस मौके पर अंत्याक्षरी, गीत-संगीत और विभिन्न खेलों का आयोजन किया गया। एडीसीपी कपिल देव सिंह ने शक्ति मिशन के तहत महिला अधिकारों और साइबर क्राइम के संबंध बताया।