लीक छोड़ तीनै चलैं शायर, सिंह, सपूत। जमाने पुरानी यह कहावत अपने शहर की कुछ महिलाएं झुठला रही हैं। इन सुपुत्रियों ने पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्रों में अपने पैर जमाकर जमाने को दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर कर दिया है। बंधी-बधाई लीक छोड़कर चलने वाली इन महिलाओं में ई-रिक्शा चालक है तो ठेकेदार और हॉकर यानी अखबार वितरक भी। आज स्त्रीशक्ति के अहसास का दिन है। आइए आप भी इन शक्तिपुंज महिलाओं के संघर्षों-अनुभवों को जानें-समझें।