गर्भवतियों का हारमोंस चक्र कोरोना से बचाव में उनके लिए कवच बन गया। संक्रमण हुआ जरूर लेकिन चक्र ने बचा लिया। इनमें कुछ गर्भवती ऐसी भी रही हैं जो कोमॉर्बिड (कई रोगों से ग्रस्त) थीं। उन्हें डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर और सांस की दिक्कत भी रही है। फिर भी सुरक्षित प्रसव हुआ तथा जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित रहे।
तीन सौ कोरोना संक्रमित महिलाओं का प्रसव हुआ लेकिन सिर्फ एक मौत हुई। इससे संबंधी रिपोर्ट जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और शासन को भेजी है। स्त्री रोग विभाग के हैलट परिसर स्थित जच्चा-बच्चा अस्पताल में इन कोरोना संक्रमित महिलाओं का प्रसव हुआ।
इनमें सिर्फ एक की मौत हुई है। उस महिला की मौत का कारण झटके की बीमारी बनी। प्रसव के दिन ही उसकी मौत हो गई थी। इसके अलावा सारी महिलाएं सुरक्षित अपने घर गईं। जच्चा-बच्चा अस्पताल में कोरोना संक्रमित इन महिलाओं की हिस्ट्री तैयार की गई है। कोरोना काल में हुए सभी प्रसव की रिपोर्ट शासन और आईसीएमआर को भेजी गई है।
12 नवजात कोरोना की गिरफ्त से निकले
तीन सौ जच्चाओं के 12 नवजात को भी कोरोना का संक्र मण हो गया था। लेकिन वे भी सुरक्षित रहे। उन्हें बालरोग अस्पताल के एनआईसीयू में रखा गया। बालरोग विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव ने बताया कि इलाज से सभी नवजात संक्रमण मुक्त हो गए। उनका रिकवरी रेट शत प्रतिशत रहा।