न तो 161 के बयान हो पा रहे थे और न ही 164 के बयान
किशोरी के पिता की तहरीर पर पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कर ली, लेकिन इसके बाद पुलिस के सामने चुनौती खड़ी हो गई। मूकबधिर और नेत्रहीन होने के कारण किशोरी का पुलिस के सामने धारा 161 के बयान नहीं हो पाए। पुलिस ने आरोपी को घटना के दो दिन बाद ही गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन उसे जेल नहीं भेज पाई। वजह यह कि न तो 161 के बयान हो पा रहे थे और न ही 164 के बयान।
मामले में कुल 15 गवाह हैं और इनमें से छह की गवाही हो चुकी है
इसके बाद में परिजनों के बयान 161 में दर्ज कर 12 नवंबर को आरोपी नरेश को पुलिस ने जेल भेज दिया। तब से अब तक किशेारी के 164 के बयान (न्यायालय के समक्ष होने वाले कलमबंद बयान) नहीं हो पा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि पुलिस ने बयान कराने के प्रयास नहीं किए। अलग अलग संस्थानों और विशेषज्ञों के जरिए बयान कराने की कोशिश हुई, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। इसके कारण आरोप पत्र दाखिल करने से लेकर सुनवाई तक में देरी हुई। अब मामले की सुनवाई तो चल रही है, लेकिन इसका आधार परिस्थिति जन्य साक्ष्य और गवाह ही हैं। मामले में कुल 15 गवाह हैं और इनमें से छह की गवाही हो चुकी है।
यह दी गई थी सलाह, पर मिला ही नहीं कोई
चेन्नई के संस्थान की ओर से सुझाए गए हिमांशु और नीरज से पुलिस ने संपर्क किया। इन दोनों ने बताया कि कोई ऐसा व्यक्ति ही मदद कर सकता है, जो बहु दिव्यांगता की भाषा समझने का डिप्लोमा किए हो। पुलिस को काफी तलाश के बाद भी ऐसा कोई शख्स नहीं मिला।