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यह जख्म है गहरा: मूकबधिर-नेत्रहीन किशोरी से हुआ था दुष्कर्म, न इशारे न भावनाएं समझ पा रहे विशेषज्ञ, पढ़ें मामला

Sun, 09 Nov 2025 06:15 AM IST
हिमांशु अवस्थी आनंद मिश्रा, अमर उजाला, हरदोई

सार

Hardoi News: मूकबधिर और नेत्रहीन होने के कारण किशोरी का पुलिस के सामने धारा 161 के बयान नहीं हो पाए। पुलिस ने आरोपी को घटना के दो दिन बाद ही गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन उसे जेल नहीं भेज पाई।
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सांकेतिक - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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जख्म गहरा भी है और हरा भी। पहले कुदरत ने दर्द दिया और फिर एक अधेड़ ने। पीड़िता की परेशानी यह कि वह अपना दर्द बयां कैसे और किससे करे। दरअसल तीन साल पहले दुष्कर्म का शिकार हुई किशोरी मूकबधिर के साथ ही नेत्रहीन भी है। पुलिस से लेकर न्यायालय तक की कार्रवाई में पुलिस और न्यायालय के समक्ष दिए गए बयान बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। न सिर्फ किशोरी बल्कि पुलिस परेशान है और तीन साल में भी किशोरी के बयान नहीं हो पाए।

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इसके कारण चार्जशीट लगने में देरी हुई और फिर आगे की न्यायिक प्रक्रिया में भी। अब भी किशोरी के बयान काफी प्रयास के बाद नहीं हो पाए हैं। अतरौली थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी (15) मूकबधिर और नेत्रहीन है। 12 सितंबर 2022 की सुबह वह गांव में ही शौच के लिए जा रही थी। कासिमपुर थाना क्षेत्र के नंदाखेड़ा निवासी नरेश कश्यप उसे बाग से तिल्ली के खेत में खींच ले गया। वहीं दुष्कर्म किया।

न तो 161 के बयान हो पा रहे थे और न ही 164 के बयान
किशोरी के पिता की तहरीर पर पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कर ली, लेकिन इसके बाद पुलिस के सामने चुनौती खड़ी हो गई। मूकबधिर और नेत्रहीन होने के कारण किशोरी का पुलिस के सामने धारा 161 के बयान नहीं हो पाए। पुलिस ने आरोपी को घटना के दो दिन बाद ही गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन उसे जेल नहीं भेज पाई। वजह यह कि न तो 161 के बयान हो पा रहे थे और न ही 164 के बयान।

मामले में कुल 15 गवाह हैं और इनमें से छह की गवाही हो चुकी है
इसके बाद में परिजनों के बयान 161 में दर्ज कर 12 नवंबर को आरोपी नरेश को पुलिस ने जेल भेज दिया। तब से अब तक किशेारी के 164 के बयान (न्यायालय के समक्ष होने वाले कलमबंद बयान) नहीं हो पा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि पुलिस ने बयान कराने के प्रयास नहीं किए। अलग अलग संस्थानों और विशेषज्ञों के जरिए बयान कराने की कोशिश हुई, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। इसके कारण आरोप पत्र दाखिल करने से लेकर सुनवाई तक में देरी हुई। अब मामले की सुनवाई तो चल रही है, लेकिन इसका आधार परिस्थिति जन्य साक्ष्य और गवाह ही हैं। मामले में कुल 15 गवाह हैं और इनमें से छह की गवाही हो चुकी है।

चेन्नई तक के विशेषज्ञों ने खड़े किए हाथ

  • बाल कल्याण समिति के आदेश पर बीएसए ने विशेष प्रशिक्षक क्षमा मिश्रा को संकेतों से किशोरी के बयान समझकर अंकित कराने की कोशिश हुई। क्षमा मिश्रा ने प्रयास किया और बाद में अवगत कराया कि वह ऐसे दिव्यांग का ही बयान करा सकती हैं, जिसे दिखाई देता हो। सधे शब्दों में कहें तो उन्होंने असमर्थता जाहिर कर दी।
  • न्यायालय के आदेश पर डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय से किशोरी का बयान दर्ज कराने के लिए विशेषज्ञ उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। वहां से जवाब मिला कि नेत्रबाधित और श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए विशेषज्ञ नहीं हैं।

  • अतरौली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ने एटा के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजा। इसमें विशेषज्ञों की मदद किशोरी का बयान दर्ज कराने के लिए मांगी गई विशेषज्ञों प्रशांत पांडेय और गौरव मिश्रा ने प्रयास करने के बाद बयान दर्ज कराने में असमर्थता जता दी।
  • चेतना स्कूल मेंटली चेकेंज लखनऊ को भी 18 अक्तूबर 2022 को पत्र भेजा गया। वहां के जिम्मेदारों ने भी खुद को असमर्थ बताते हुए बयान करा पाने और संकेत न समझपाने की बात कहकर पत्र भेज दिया।
  • बेसिक शिक्षा निदेशक को भी 26 नवंबर 2022 को पत्र भेजकर किशोरी के बयान दर्ज कराने में सहयोग मांगा गया। उन्हें बताया गया कि किशोरी का बयान कराने के लिए एटा, बस्ती, उन्नाव भेजा गया था। यहां के विशेषज्ञ कुछ मदद नहीं कर पाए। अब अगर पूरे प्रदेश में कहीं ऐसे विशेषज्ञ हों तो मदद करा दी जाए।

  • तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने 30 नवंबर 2022 को राजकीय संकेत विद्यालय को भी पत्र भेजकर प्रकरण में किशोरी के बयान दर्ज कराने में मदद मांगी। छह दिसंबर 2022 को विद्यालय की ओर से संकेत न समझ पाने की बात कहते हुए जवाब भेज दिया गया।
  • दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उपनिदेशक को 27 जून 2023 को भी पत्र भेजकर बयान कराने में सहयोग मांगा गया। यहां के जिम्मेदारों ने भी खुद को अक्षम मानते हुए बयान करा पाने में असमर्थता जताई।
  • राष्ट्रीय दृषि बाधित संस्थान देहरादून को 18 सितंबर 2023 को किशोरी को भेजकर बयान दर्ज कराने के लिए प्रशिक्षण भी देने की कोशिश हुई। यह कोशिश भी 22 सितंबर 2023 को नाकाम हो गई।
  • राष्ट्रीय बहु दिव्यांगता जन सशक्तिकरण संस्थान चेन्नई में भी 11 अक्तूबर 2023 को पत्र भेजकर मदद मांगी गई। किशोरी के मूकबधिर होने के साथ ही नेत्र हीन होने का भी उल्लेख पत्र में था। इस पर संस्थान से भी कोई मदद नहीं मिल पाई।
  • चेन्नई के संस्थान ने 8 जनवरी 2024 को एक पत्र भेजा। इस पत्र में हिमांशू और नीरज के नाम पता का उल्लेख करते हुए इनसे संपर्क करने पर मदद की उम्मीद बताई गई। हालांकि इन दोनों ने भी मदद कर पाने में असमर्थता जता दी।
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यह दी गई थी सलाह, पर मिला ही नहीं कोई
चेन्नई के संस्थान की ओर से सुझाए गए हिमांशु और नीरज से पुलिस ने संपर्क किया। इन दोनों ने बताया कि कोई ऐसा व्यक्ति ही मदद कर सकता है, जो बहु दिव्यांगता की भाषा समझने का डिप्लोमा किए हो। पुलिस को काफी तलाश के बाद भी ऐसा कोई शख्स नहीं मिला।
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