आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) की बैठक सोमवार को दिल्ली में हुई। इसमें एयरोस्पेस विभाग के दलित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुब्रहमण्यम सडरेला के उत्पीड़न मामले की जांच रिपोर्ट पेश की गई। घंटों बहस के बाद बीओजी चेयरमैन और मारुति उद्योग लिमिटेड के चेयरमैन आरसी भार्गव ने फैसला लिया कि वह खुद आरोपी और पीड़ित प्रोफेसर से बातचीत कर मामला सुलझाने का प्रयास करेंगे। सात दिनों में अगर सफलता मिलती है तो ठीक नहीं तो जांच में दोषी पाए गए चारों प्रोफेसरों पर कार्रवाई होगी। इसके लिए सात दिन बाद ही एक कमेटी का गठन भी कर दिया जाएगा।
कहीं निदेशक पद की राजनीति तो नहीं
आईआईटी में प्रोफेसरों के बीच शुरू हुई जंग का मुख्य कारण संस्थान का निदेशक पद बताया जा रहा है जो पिछले दिनों तक खाला था। कुछ प्रोफेसरों का दावा है कि संस्थान के कई वरिष्ठ प्रोफेसर कानपुर, धनबाद व कुछ अन्य आईआईटी के निदेशक पद की दौड़ में आगे थे। इन प्रोफेसरों को रोकने के लिए भी संस्थान के ही कुछ प्रोफेसर जुटे थे। दलित असिस्टेंट प्रोफेसर के उत्पीड़न का मामला भी इसी राजनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
चार प्रोफेसर पाए गए हैं दोषी
मामले में जांच कमेटी ने चार प्रोफेसरों को दोषी पाया है। इनमें दो प्रोफेसरों के खिलाफ जांच कमेटी ने सबूत पाए हैं जबकि दो के खिलाफ कुछ अन्य प्रोफेसरों ने गवाही दी है। इनमें दो प्रोफेसर एयरोस्पेस डिपार्टमेंट से हैं जबकि दो मटेरियल साइंस डिपार्टमेंट से। हालांकि संस्थान के कई प्रोफेसरों ने जांच कमेटी और रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े किए हैं।