कानपुर देहात। अकबरपुर के ऐतिहासिक शुक्ल तालाब परिसर में बारादरी वेडिंग डेस्टिनेशन (विवाह स्थल) बनने से रोजगार के अवसर खुलेंगे। स्थानीय लोगों को काम मिलेगा। वहीं पर्यटन विकास से आमदनी बढ़ेगी।
अकबरपुर में कानपुर इटावा हाईवे के करीब शुक्ल तालाब है। परिसर में बारादरी है। इसे पीपीपी मॉडल पर विवाह स्थल के तौर पर विकसित करने पर सहमति बनी है। पर्यटन निदेशक और विकासकर्ता एजेंसी के बीच मंगलवार को एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। करीब 38 करोड़ रुपये से वेडिंग डेस्टिनेशन विकसित करने की योजना है। जल्द कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
विवाह आयोजन से जुड़े कारीगरों, माली, श्रमिकों, व्यंजन कारीगरों व सफाई मित्रों को काम मिलेगा। पर्यटन विकास से स्थानीय कारोबारियों की आमदनी भी बढ़ेगी। जिला पर्यटन अधिकारी अर्जिता ओझा ने बताया बताया कि विभाग में स्टेट लेवल से हेरीटेज बिल्डिंग के विकास कार्यक्रम तय हो रहे हैं। पॉलिसी तय होने पर कानपुर कार्यालय को जिम्मेदारी मिलेगी। शुक्ल तालाब में वेडिंग डेस्टिनेशन बनने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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इसलिए खास है मुगलकालीन शुक्ल तालाब
अकबरपुर में मुगलकालीन शुक्ल तालाब है। यहां बारादरी, शिवमंदिर, स्नानागार, पक्का तालाब वास्तुकारी का नायाब नमूना है। वहीं यह स्थल देश की आजादी में प्राण न्योछावर करने वाले वीरों की स्मृति से जुड़ा है। मुगल सम्राट अकबर के नवरत्न में शामिल बीरबल ने कारखास शीतल शुक्ल को 1563 में दीवान नियुक्त किया था। 1578 में सूखा और अकाल पड़ा। इसपर शीतल शुक्ल ने एकत्र राजस्व राजकोष में जमा करने के बजाय पक्का तालाब व बारादरी का निर्माण कराया। बाद में 1857 की क्रांति में अंग्रेजी फौज ने बरादरी परिसर में क्रांतिकारियों को फांसी दी थी।
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आकर्षित होंगे देश-दुनिया के पर्यटक
खास रखरखाव नहीं होने से इमारत को लगातार नुकसान हो रहा है। मुख्य बारादरी के सामने बने निर्माण की छतों पर पौधे उग आए हैं। वहीं स्नानागार बिना मरम्मत कई जगह से क्षतिग्रस्त हो रहा है। पर्यटन विभाग पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर यह परिसर विकसित करेगा। कला और शिल्प, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। देश दुनिया के पर्यटक आकर्षित होंगे। शादी समारोह में लोग यादें सजोंएगे। एक जिला एक उत्पाद का प्रोत्साहन होगा। नजदीक के एक गांव में विकास कार्य होंगे।